“अधिकारी आंखें क्यों मूंद लेते हैं?” — छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंदगी, कछुओं की मौत और स्मार्ट सिटी कुप्रबंधन पर अधिकारियों को लगाई फटकार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर शहर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में फैली गंभीर नागरिक समस्याओं पर मंगलवार को नगर निगम और राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने मंदिर तालाब में दो दर्जन से अधिक कछुओं की मौत, स्मार्ट सिटी परियोजना की दुर्दशा और रिहायशी इलाकों में फैली गंदगी को लेकर गहरी चिंता जताई।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह मामला WPPIL No. 39 of 2025 शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किया। यह याचिका प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों — नवभारत, हरिभूमि, और दैनिक भास्कर में 26 मार्च 2025 को प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर दर्ज की गई।

मामला क्या है?

यह जनहित याचिका तीन मुख्य नागरिक समस्याओं पर आधारित है:

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1. शुभम विहार (वार्ड 14 और 15), बिलासपुर में गंदगी का अंबार:

सड़कों पर बदबूदार और ठहरा हुआ पानी, बंद नालियां और सीवर लाइनें। इससे डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

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2. महामाया मंदिर, रतनपुर के तालाब में कछुओं की सामूहिक मौत:

करीब दो दर्जन कछुए मछलियां पकड़ने के लिए डाले गए अवैध जाल में फंसकर मर गए। यह घटना सीसीटीवी कैमरे और कंट्रोल रूम की निगरानी के बावजूद अनदेखी रह गई, जिससे मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए।

3. स्मार्ट सिटी परियोजना की विफलता:

दिव्यांगजनों के लिए बनाए गए विशेष फुटपाथ टूटे हुए, अतिक्रमण से ग्रस्त और सामान्य पैदल यात्रियों के लिए भी अनुपयोगी पाए गए। कोर्ट ने बताया कि 40 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और सौंदर्यीकरण के कार्य उपेक्षा का शिकार हैं।

कानूनी मुद्दे

  • जन स्वास्थ्य और स्वच्छता सुनिश्चित करने में प्रशासन की विफलता
  • पर्यावरण संरक्षण कानूनों, विशेषकर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का उल्लंघन
  • बजटीय आवंटन के बावजूद सार्वजनिक अवसंरचना का रखरखाव न होना
  • संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा का अधिकार
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अदालत की टिप्पणियां

खंडपीठ ने जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता पर तीखी टिप्पणी की:

“वे आंखें क्यों मूंद लेते हैं और अखबारों, इलेक्ट्रॉनिक तथा सोशल मीडिया में आई रिपोर्टों के बावजूद स्थिति की सुध क्यों नहीं लेते?”

कोर्ट ने कहा कि प्रकाशित तस्वीरें “बेहद दयनीय स्थिति” को दर्शाती हैं और जनता की बार-बार की शिकायतों के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

स्मार्ट सिटी परियोजना पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा:

“पूरी खबर बिलासपुर शहर की बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करती है, जबकि यह एक घोषित स्मार्ट सिटी है।”

मंदिर तालाब में हुई घटना को लेकर कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए कहा:

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“सीसीटीवी निगरानी के बावजूद कोई व्यक्ति जाल लेकर तालाब तक पहुंचा… मछलियों की जगह कछुए फंसे और मर गए, जो मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।”

अदालत के निर्देश

  • कलेक्टर, बिलासपुर और आयुक्त, नगर निगम बिलासपुर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश
    • उन्होंने अब तक क्या कार्रवाई नहीं की?
    • समाचार प्रकाशन के बाद क्या कदम उठाए गए?

इसके साथ ही यह मामला स्वच्छता से जुड़े पहले से लंबित WPPIL No. 39 of 2024 से जोड़ा गया है। अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2025 को होगी।

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