चेक बाउंस मामलों का निस्तारण के लिए कानून में संशोधन करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों के जल्द निपटाने के लिए कई दिशनिर्देश जारी करते हुए केंद्र सरकार से कानून संशोधन कर एक ही लेनदेन से संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध एक वर्ष के अंदर दर्ज मामलों के साथ जोड़ने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने देश के समस्त हाई कोर्ट को चेक बाउंस मामलों से निपटने के लिए लोअर कोर्ट को निर्देश जारी करने को निर्देशित किया है।

सीजेआई बोबडे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कहा,चेक बाउंस मामलों में साक्ष्यों को एफेडेविट दाखिल कर पेश किया जा सकता है।साथ ही गवाहों को बुलाकर जांच करने की आवश्यकता नही होगी। पीठ ने नगोशिएबल इंस्ट्रूमेंटस एक्ट में संशोधन को कहा ताकि एक व्यक्ति के खिलाफ एक साल के अंदर दर्ज चेक बाउंस के मामलों को एक साथ जोड़कर मुकदमा चलाया जा सके।पीठ ने अपने पुराने आदेश को दोहराते हुए कहा कि लोअर कोर्ट के पास चेक बाउंस मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए व्यक्तियों को तलब करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की स्वाभाविक शक्तियां नही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन मुद्दों पर उसने विचार नही किया है उन पर बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जज आर सी चव्हाण की अध्यक्षता वाली समिति विचार करेगी।सुप्रीम कोर्ट ने 10 मार्च को इस समिति का गठन किया था और समिति को तीन महीने के अंदर रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने के लिए कहा था कि देश भर में चेक बाउंस के मामलों के जल्द निस्तारण के किया क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

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