उम्मीदवारो से जुड़े क्रिमिनल रिकॉर्ड की जानकारी सार्वजनिक न करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित किया फैसला

नई दिल्ली–राजनीतिक पार्टियों द्वारा बिहार चुनाव में उम्मीदवारो से जुड़े क्रिमिनल रिकॉर्ड की जानकारी सार्वजनिक न करने से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है। याचिकाकर्ता द्वारा अपील की गई थी कि कई राजनीतिक पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों की जानकारी साझा नही की है। ऐसे में उनके खिलाफ एक्शन लिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ से हरीश साल्वे ने कहा कि देश की राजनीति में व्यापक बदलाव लाने के लिए बड़े स्तर पर चर्चा की आवश्यकता है। सभी राजनीतिक दलों की कोशिश केवल चुनाव जीतने पर रहती है। पहले राजनीतिक दलों को संपति घोषित करने में दिक्कत होती थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विधायिका की तरफ से इस तरह की चीजों को रोकने के लिए कोई भी फैसला नही लेने की उम्मीद है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि वह उम्मीदवार जेल से बाहर आकर चुनाव लड़ता है तो वह चुनाव जीतेगा क्योंकि वह किसी को भी मार सकता है,ऐसे में हम सभी को व्यापक मुद्दे को देखना चाहिए।

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एमिकस क्यूरी केवी विश्वनाथन ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ को जानकारी दी की सीपीआई और एनसीपी के उम्मीदवारों ने क्रिमिनल रिकॉर्ड की जानकारी नही दी है। ऐसे में इन राजनीतिक पार्टियों पर एक्शन लिया जाना चाहिए,अन्य राजनीतिक दलों की भी जांच की जानी चाहिए। चुनाव आयोग की तरफ से हरीश साल्वे ने कहा की यदि कोर्ट किसी राजनीतिक पार्टी पर जुर्माना लगाता है तो वह एक रुपये जैसे सांकेतिक नही होना चाहिए। हम यह नही चाहेंगे कि नेता एक रुपये देते हुए फोटो खिंचाते हुए दिखे।

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