बंगाल हिंसा पर ममता सरकार के कदमों की हाई कोर्ट ने सराहना की

कोलकत्ता—- बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही लगातार हो रही हिंसा के विरुद्ध ममता सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की हाई कोर्ट में सराहना की है। साथ ही केंद्र द्वारा राज्य में हो रही हिंसा को लेकर एक पूर्व आईएएस के नेतृत्व में एसआईटी के गठन करने की मांग को खारिज कर दिया। कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस राजेश बिंदल ने चुनाव के बाद से राज्य में हो रही हिंसा पर दाखिल मामले की सुनवाई की। 

हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान ही राज्य सरकार से हिंसा को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। दरअसल चुनाव के बाद हो रही हिंसा पर केंद्र सरकार और राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने चिंता जाहिर की है। गृहमंत्रालय की टीम लगातार हिंसा प्रभावित क्षेत्रों पर निगरानी कर रही है। 

कोर्ट की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि सात मई के बाद कोई हिंसा नही हुई है। जबकि केंद्र सरकार के पक्षकार वकील ने एक पूर्व आईएएस अफसर के नेतृत्व में हिंसा की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है।

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इस पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने याचिका को रदद कर करते हुए कहा की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने अच्छा कार्य किया। कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदारी है। अब नागरिक का अभिभावक राज्य सरकार है। दूसरी तरफ राज्य के महाधिवक्ता ने कहा कि फिलहाल राज्य में कोई हिंसा की घटना नही हुई है। 

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