बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखे शब्दों में सवाल उठाया कि क्या राज्य में कानून का शासन है और क्या मुख्यमंत्री इतने “लाचार” हैं कि वे एक मंत्री के बेटे के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं कर पा रहे, जो गिरफ्तारी से बचते हुए कई हफ्तों से फरार है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति माधव जामदार ने उस समय दी जब शिवसेना मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले की ओर से पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता श्रीयंश जगताप की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया गया।
यह मामला 2 दिसंबर को रायगढ़ जिले के महाड में हुए नगरपरिषद चुनाव के दौरान हुई हिंसक झड़प से जुड़ा है, जिसमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के समर्थक आमने-सामने आ गए थे। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और क्रॉस-एफआईआर हुई थी।
विकास गोगावले और उनके चचेरे भाई महेश ने अग्रिम ज़मानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। वहीं श्रीयंश जगताप को दिसंबर में अंतरिम सुरक्षा मिल गई थी, लेकिन जब उनकी जमानत याचिका खारिज हुई तो वे फरार हो गए।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जामदार ने पुलिस की निष्क्रियता और आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
कोर्ट ने कहा,
“क्या मुख्यमंत्री इतने लाचार हैं कि एक मंत्री के खिलाफ भी कुछ नहीं बोल सकते? मंत्री के बेटे अपराध करते हैं और खुलेआम घूमते हैं… वे अपने माता-पिता के संपर्क में रहते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाती?”
न्यायाधीश ने पुलिस को भी आड़े हाथों लिया और कहा –
“आप पर दबाव हो सकता है, लेकिन अदालत पर नहीं। क्या राज्य में कानून-व्यवस्था और कानून का शासन है?”
कोर्ट की फटकार के बाद, महाराष्ट्र के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को आश्वस्त किया कि मंत्री भरत गोगावले अपने बेटे से संपर्क करेंगे और अगले दिन उसे सरेंडर करवाएंगे।
“वह (गोगावले) अपने बेटे से संपर्क करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वह कल आत्मसमर्पण करे,” महाधिवक्ता ने कहा।
कोर्ट ने यह बयान रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए तय की और निर्देश दिया कि विकास गोगावले शुक्रवार को सुनवाई से पहले आत्मसमर्पण करें।

