बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि ब्रोकर के सिस्टम में तकनीकी खराबी (Technical Glitch) के कारण किसी ट्रेडर को गलती से अधिक मार्जिन मिल जाता है और वह उससे मुनाफा कमाता है, तो ब्रोकर उस मुनाफे पर दावा नहीं कर सकता। कोर्ट ने कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड की याचिका को खारिज करते हुए अपीलीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Appellate Arbitral Tribunal) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें ट्रेडर को लगभग 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा अपने पास रखने की अनुमति दी गई थी।
जस्टिस संदीप वी. मारणे की पीठ ने मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ब्रोकर ‘अनुचित संवर्धन’ (Unjust Enrichment) के आधार पर मुनाफे का दावा नहीं कर सकता, खासकर तब जब उसे कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ हो और उसने उक्त लेनदेन पर ब्रोकरेज और ब्याज भी वसूला हो।
मामले की पृष्ठभूमि
प्रतिवादी, गजानन रामदास राजगुरु का कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड (याचिकाकर्ता) के पास एक ट्रेडिंग खाता था। 26 जुलाई 2022 को उनके खाते में केवल 3,175.69 रुपये का लेजर बैलेंस था।
याचिकाकर्ता के सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण, प्रतिवादी को उनके खाते में गलती से अत्यधिक मार्जिन क्रेडिट मिल गया। इस तकनीकी त्रुटि का उपयोग करते हुए, प्रतिवादी ने लगभग 20 मिनट के भीतर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में लगभग 94.81 करोड़ रुपये के सौदे किए। सामान्य परिस्थितियों में, इतने बड़े सौदों के लिए लगभग 40 करोड़ रुपये के मार्जिन की आवश्यकता होती।
इन सौदों से प्रतिवादी ने 1.75 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। शुरुआत में, कोटक सिक्योरिटीज ने एक कॉन्ट्रैक्ट नोट जारी कर मुनाफे को क्रेडिट किया, लेकिन बाद में यह दावा करते हुए एंट्री को उलट दिया कि अपर्याप्त मार्जिन के कारण ये सौदे अनधिकृत थे। ब्रोकर ने प्रतिवादी के खाते से 1,75,01,672.92 रुपये डेबिट कर लिए।
यह विवाद पहले शिकायत निवारण समिति (GRC) और फिर एक निचले मध्यस्थता न्यायाधिकरण के पास गया, जिन्होंने प्रतिवादी के दावे को खारिज कर दिया था। हालांकि, अपीलीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने 25 अक्टूबर 2023 को दिए अपने फैसले में इन निष्कर्षों को पलट दिया और कोटक सिक्योरिटीज को 12% ब्याज के साथ राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
पक्षों की दलीलें
कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड का पक्ष: वरिष्ठ अधिवक्ता पेसी एन. मोदी ने तर्क दिया कि प्रतिवादी ने सिस्टम की खराबी का “दुरुपयोग” किया। उनकी मुख्य दलीलें थीं:
- अनुचित संवर्धन (Unjust Enrichment): प्रतिवादी को केवल एक गलती से प्राप्त लाभ को रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
- माल खोजने वाला (Finder of Goods): भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 71 और 163 का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि यदि किसी व्यक्ति को किसी और का ‘माल’ मिलता है, तो उसे उस माल से हुई किसी भी वृद्धि को लौटाना होगा।
- नियमों का उल्लंघन: एनएसई (F&O) विनियमों के विनियम 3.10 के तहत, ट्रेडिंग से पहले मार्जिन जमा करना अनिवार्य है।
प्रतिवादी का पक्ष: अधिवक्ता नितेश वी. भुतेकर ने अपीलीय आदेश का समर्थन करते हुए कहा:
- जोखिम और कौशल: प्रतिवादी ने अपने कौशल का उपयोग करके सौदे किए और जोखिम उठाया। यदि नुकसान होता, तो याचिकाकर्ता निश्चित रूप से प्रतिवादी से उसकी वसूली करता।
- वैध अनुबंध: याचिकाकर्ता ने कॉन्ट्रैक्ट नोट जारी किए, लेवी (levies) काटी और ब्याज भी वसूला, जिससे यह साबित होता है कि सौदे वैध थे।
- ब्रोकर को कोई नुकसान नहीं: याचिकाकर्ता को तकनीकी खराबी के कारण कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ, बल्कि वह प्रतिवादी द्वारा कमाए गए मुनाफे को हथियाने का प्रयास कर रहा है।
कोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणियाँ
जस्टिस मारणे ने अनुबंध अधिनियम की प्रयोज्यता और अनुचित संवर्धन के सिद्धांत का बारीकी से विश्लेषण किया।
1. मार्जिन मनी ‘माल’ (Goods) नहीं है हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 71 और 163 (माल खोजने वाले से संबंधित) पर दिए गए तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा:
“माल बिक्री अधिनियम, 1930 की धारा 2(7) के तहत ‘माल’ (Goods) को परिभाषित किया गया है… परिभाषा में विशेष रूप से ‘पैसे’ (Money) को बाहर रखा गया है… इसलिए, याचिकाकर्ता द्वारा प्रतिवादी को गलती से उपलब्ध कराए गए मार्जिन मनी को माल बिक्री अधिनियम के अर्थ में ‘माल’ नहीं माना जा सकता।”
2. अनुचित संवर्धन का दावा खारिज कोर्ट ने देखा कि याचिकाकर्ता को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ था और उसने ब्रोकरेज भी कमाया था। कोर्ट ने टिप्पणी की:
“यह याचिकाकर्ता का मामला नहीं है कि उसे प्रतिवादी को गलती से मार्जिन उपलब्ध कराने के कारण कोई नुकसान हुआ है… अन्यथा भी, यह कोर्ट इस स्थिति को स्वीकार करने में असमर्थ है कि याचिकाकर्ता गलती करेगा और भले ही उसे उस गलती से कोई नुकसान नहीं हुआ हो, फिर भी वह प्रतिवादी द्वारा निष्पादित ट्रेडों से लाभ का दावा करके खुद को समृद्ध करेगा।”
3. जोखिम और प्रतिफल का आवंटन कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि मुनाफा प्रतिवादी के ट्रेडिंग निर्णयों और जोखिम लेने का परिणाम था।
“प्रतिवादी ने इस तरह के अनुचित अवसर का उपयोग किया, जोखिम उठाया, अपने कौशल का उपयोग किया और मुनाफा कमाया… यदि ट्रेडों में नुकसान होता, तो याचिकाकर्ता निश्चित रूप से प्रतिवादी से उसकी वसूली करता… यदि नुकसान की देनदारी प्रतिवादी की थी, तो मुनाफे का लाभ भी उसी में निहित होना चाहिए।”
फैसला
हाईकोर्ट ने पाया कि अपीलीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले में कोई अवैधता नहीं थी। कोर्ट ने माना कि न्यायाधिकरण का यह दृष्टिकोण तर्कसंगत था कि केवल सिस्टम की गलती ब्रोकर को क्लाइंट के मुनाफे का दावा करने का अधिकार नहीं देती है।
आदेश:
“मध्यस्थता याचिका विफल होनी चाहिए। तदनुसार इसे खारिज किया जाता है। प्रतिवादी इस कोर्ट में जमा की गई पूरी राशि को अर्जित ब्याज के साथ वापस लेने का हकदार होगा।”
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपील करने की अनुमति देने के लिए धनराशि की निकासी पर पांच सप्ताह की रोक लगाई है।
केस डिटेल्स:
- केस टाइटल: कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड बनाम गजानन रामदास राजगुरु
- केस नंबर: कमर्शियल आर्बिट्रेशन पेटीशन नंबर 788 ऑफ 2024
- कोरम: जस्टिस संदीप वी. मारणे
- याचिकाकर्ता के वकील: वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पेसी एन. मोदी, साथ में श्री कुणाल कटारिया, श्री शैलेश प्रजापति और श्री अंकित सिंघल (दुआ एसोसिएट्स द्वारा निर्देशित)।
- प्रतिवादी के वकील: श्री नितेश वी. भुतेकर, साथ में श्री आदित्य महामिया।

