मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव में नामांकन फॉर्म अस्वीकार किए जाने को लेकर आठ उम्मीदवारों ने मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधानसभा अध्यक्ष और बीजेपी विधायक राहुल नारवेकर के दबाव में रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके फॉर्म स्वीकार नहीं किए।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ के समक्ष उल्लेख के लिए लाया गया। याचिकाकर्ताओं ने अनुरोध किया कि राज्य चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को उनके नामांकन फॉर्म स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए।
गौरतलब है कि बीएमसी चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने वाले हैं।
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता और अन्य स्वतंत्र उम्मीदवारों ने वार्ड संख्या 224 से 227 के लिए सभी आवश्यक दस्तावेजों और सुरक्षा राशि के साथ समय पर फॉर्म जमा किए थे, लेकिन राहुल नारवेकर ने रिटर्निंग ऑफिसर पर दबाव बनाकर उन्हें अस्वीकार करवाया।
“नारवेकर ने विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अपने पद और राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और पुलिस बल का इस्तेमाल कर याचिकाकर्ताओं को रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय से बाहर निकलवा दिया,” याचिका में आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग से की गई शिकायतों का कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि राहुल नारवेकर के भाई मकरंद नारवेकर, बहन गौरी शिवलकर, और भाभी हर्षिता शिवलकर बीएमसी के वार्ड 225, 226 और 227 से चुनाव लड़ रहे हैं।
विपक्षी दलों ने नारवेकर पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, नामांकन प्रक्रिया में हस्तक्षेप, और सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं।
हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
हालांकि याचिकाकर्ताओं ने मामले की तात्कालिक सुनवाई की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका नियत प्रक्रिया के अनुसार सुनी जाएगी।
राहुल नारवेकर ने सभी आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।

