हत्या से दो हफ्ते पहले, अतीक ने यूपी पुलिस हिरासत में सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था 

नई दिल्ली, 16 अप्रैल गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद की प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा में गोली मारकर हत्या किए जाने के दो सप्ताह पहले, सुप्रीम कोर्ट ने उमेश पाल हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ उसकी हिरासत के दौरान सुरक्षा की मांग करने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

अहमद (60) और उसके भाई अशरफ को तीन लोगों ने शनिवार की रात मीडिया से बातचीत के दौरान गोली मार दी थी, जब पुलिसकर्मी उसे मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए ले जा रहे थे।

शीर्ष अदालत ने 28 मार्च को अहमद की सुरक्षा की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि उत्तर प्रदेश की राज्य मशीनरी उसकी जान को खतरा होने की स्थिति में उसकी सुरक्षा का ध्यान रखेगी।

जब अतीक की याचिका शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी, तब जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने उसे सुरक्षा के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी थी, क्योंकि अतीक ने दावा किया था कि हिरासत में रहने के दौरान उसकी जान को खतरा था। 

“चूंकि वह न्यायिक हिरासत में है, उत्तर प्रदेश राज्य मशीनरी उसके जीवन के लिए खतरे के मामले में उसकी सुरक्षा का ध्यान रखेगी,” अदालत ने समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद के वकील के आग्रह को रिकॉर्ड करने से इनकार करते हुए कहा था कि उसका जीवन खतरे में है। 

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पीठ ने कहा था, “यह ऐसा मामला नहीं है जहां यह अदालत हस्तक्षेप करने जा रही है। उच्च न्यायालय के समक्ष उचित आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता दी गई है। कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।”

अतीक ने यह दावा करते हुए सुरक्षा की मांग की थी कि उसे और उसके परिवार को प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड में झूठे आरोप में फंसाया गया है।

2005 में तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह उमेश पाल और उनके दो सुरक्षा गार्ड 24 फरवरी को एक गोलीबारी में मारे गए थे।

शीर्ष अदालत के निर्देश पर पहले गुजरात के अहमदाबाद केंद्रीय कारागार में बंद अहमद ने अपनी याचिका में विधानसभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए बयान का जिक्र किया था, जिसमें कहा गया था कि ‘पूरी तरह से बर्बाद और नष्ट’ कर दो। और दावा किया कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों के जीवन के लिए एक “वास्तविक और बोधगम्य खतरा” है।

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