आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र वैधानिक नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि आर्य समाज द्वारा जारी किए गए विवाह प्रमाण पत्र में कोई वैधानिक बल नहीं है।

जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी और जस्टिस राजेंद्र कुमार की खंडपीठ के अनुसार, वैध विवाह प्रमाण पत्र के अभाव में, आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र को वैध विवाह का प्रमाण नहीं माना जाता है।

कोर्ट ने ये टिप्पणियां फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाले एक व्यक्ति द्वारा दायर पहली अपील पर सुनवाई करते हुए की थीं, जिसने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत उसके आवेदन को खारिज कर दिया था।

अपीलकर्ता ने प्रतिवादी के साथ वैवाहिक अधिकारों की बहाली की मांग करते हुए अधिनियम के अंतर्गत धारा 9 का आवेदन दायर किया था, जिसका उसने दावा किया था कि वह उसकी पत्नी थी।

अदालत के समक्ष, अपीलकर्ता ने प्रस्तुत किया कि उसने आर्य समाज विवाह रीति-रिवाजों का पालन करते हुए प्रतिवादी से शादी की और अदालत को आर्य समाज ट्रस्ट विवाह प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया।

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शुरुआत में, खंडपीठ ने पाया कि अपीलकर्ता ने उसके सामने ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं रखा है, जो आर्य समाज को विवाह प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति देता हो।

अदालत ने आगे कहा कि अपीलकर्ता ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 8 के तहत विवाह के प्रमाण के रूप में कोई दस्तावेज या सबूत दायर नहीं किया है। अदालत ने यह भी कहा कि अपीलकर्ता ने स्वीकार किया है कि कथित विवाह में सप्तपदी के समारोह और संस्कार नहीं हुए थे, इसलिए विवाह का तथ्य साबित नहीं होता है।

वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए अपीलकर्ता की याचिका के संबंध में, पीठ ने कहा कि चूंकि शादी का कोई सबूत नहीं है, इसलिए फैमिली कोर्ट ने अपीलकर्ता की याचिका को खारिज करना सही था।

इस प्रकार देखते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया।

शीर्षक: आशीष मोरया बनाम अनामिका धूमल
कांड संख्या प्रथम अपील संख्या 830/2022

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