पंजाब के खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद और एनएसए के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को बुधवार को बताया गया कि लोकसभा के नियमों में वर्चुअल माध्यम से संसद सत्र में भागीदारी की कोई व्यवस्था नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान भारत सरकार और लोकसभा अध्यक्ष की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने दलील दी कि संविधान के तहत संसद की कार्यवाही में सांसद की शारीरिक रूप से उपस्थिति अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “लोकसभा के नियमों और प्रक्रिया में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो वर्चुअल उपस्थिति की अनुमति देता हो।”
जैन ने अदालत को यह भी बताया कि लोकसभा सचिवालय ने 9 फरवरी को अमृतपाल सिंह को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि किसी भी बंद सांसद को संसद में भाग लेने की अनुमति देना उस प्राधिकरण का कार्य है, जिसने उसे हिरासत में लिया है। लोकसभा की इस प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं है।
सचिवालय ने यह भी उल्लेख किया कि अमृतपाल अब तक 37 दिनों से लोकसभा की कार्यवाही से अनुपस्थित हैं। जैन ने कहा कि यदि कोई सांसद लगातार 60 दिन कार्यवाही से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सीट रिक्त घोषित की जा सकती है। हालांकि, लोकसभा की एक समिति उसके आवेदन पर विचार कर अनुपस्थिति को माफ कर सकती है।
अमृतपाल सिंह ने संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए अस्थायी रिहाई की मांग की थी। अदालत ने पिछले महीने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह उनकी अर्जी पर सात कार्यदिवस के भीतर निर्णय ले। इसके बाद पंजाब सरकार ने 2023 के अजनाला कांड और राज्य की सुरक्षा पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए उनकी अर्जी खारिज कर दी।
इस बार उन्होंने संसद में पंजाब में 2025 की बाढ़, राज्य में बढ़ते नशे की समस्या और अपने क्षेत्र खडूर साहिब से जुड़े विकास कार्यों को उठाने की बात कही थी।
बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।
‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह को अप्रैल 2023 में मोगा जिले के रोडे गांव से गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 23 फरवरी, 2023 को अजनाला थाने पर किए गए हिंसक प्रदर्शन और पुलिस से भिड़ंत के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई थी। इसमें कई समर्थक तलवार और बंदूक लेकर पुलिस थाने में घुस आए थे।
अमृतपाल ने 2024 का लोकसभा चुनाव जेल से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और खडूर साहिब से विजयी हुए। अप्रैल 2025 में उनकी एनएसए के तहत हिरासत बढ़ा दी गई, हालांकि उनके साथ गिरफ्तार किए गए 9 सहयोगियों को पंजाब लाया जा चुका है।
उन्होंने पहले भी संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन सुनवाई पूरी होने से पहले सत्र समाप्त हो गया और याचिका निष्प्रभावी हो गई।

