इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हरदोई में अवैध औद्योगिक स्थापना पर स्वतः संज्ञान लिया, बिना प्रदूषण बोर्ड की मंजूरी के निर्माण पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की वैध सहमति के बिना हरदोई में एक औद्योगिक इकाई की स्थापना या संचालन पर रोक लगा दी है। मामले में निहित व्यापक जनहित को देखते हुए, कोर्ट ने भारतीय किसान मजदूर यूनियन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) को ‘स्वतः संज्ञान’ (Suo Motu) कार्यवाही में तब्दील कर दिया है। कोर्ट ने आगे की कार्यवाही में सहायता के लिए श्री अभिनव भट्टाचार्य को ‘एमिकस क्यूरी’ (न्याय मित्र) नियुक्त किया और निर्देश दिया कि पक्षकारों के बीच अभिवचनों का आदान-प्रदान किया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ जनहित याचिका (PIL) संख्या 4 वर्ष 2026 पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका सुनील तिवारी (जिला अध्यक्ष) के माध्यम से भारतीय किसान मजदूर यूनियन द्वारा दायर की गई थी।

याचिका में हरदोई जिले की संडीला तहसील के ग्राम छावन में विपक्षी संख्या 9 द्वारा कथित रूप से अवैध उद्योग स्थापित करने का मुद्दा उठाया गया था। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उक्त प्रतिवादी द्वारा गांव सभा या सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है।

पक्षकारों की दलीलें

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सुनवाई के दौरान विपक्षी संख्या 3 के विद्वान अधिवक्ता श्री ए.के. वर्मा ने न्यायालय को अवगत कराया कि उद्योग द्वारा मांगी गई ‘स्थापना की सहमति’ (Consent to Establish) को यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 11 दिसंबर, 2025 को खारिज कर दिया है और इसकी जानकारी संबंधित पक्ष को दे दी गई है।

वहीं, उद्योग (विपक्षी संख्या 9) की ओर से पेश अधिवक्ता श्री समीर कुमार सिंह ने स्वीकार किया कि मौके पर अभी केवल चारदीवारी का निर्माण हुआ है। उन्होंने बेंच को भविष्य की निर्माण गतिविधियों के संबंध में आश्वासन दिया।

आदेश में दर्ज अनुसार, अधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि “जब तक संबंधित कानूनों के तहत सभी आवश्यक एनओसी (NOC), अनुमतियां या सहमति सक्षम प्राधिकारियों/निकायों से प्राप्त नहीं कर ली जातीं, तब तक उद्योग स्थापित करने के लिए कोई आगे की गतिविधि नहीं की जाएगी।”

कोर्ट का आदेश और महत्वपूर्ण टिप्पणियां

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कोर्ट ने 11 दिसंबर, 2025 के अस्वीकृति आदेश को रिकॉर्ड पर लिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि उद्योग की स्थापना के लिए पर्यावरण कानूनों के तहत वैधानिक अनुपालन अनिवार्य है।

कोर्ट ने कहा:

“जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के प्रावधानों के तहत यूपी प्रदूषण बोर्ड से स्थापना की सहमति के अभाव में, विपक्षी संख्या 9 प्रश्नगत उद्योग को स्थापित या संचालित करने के लिए आगे नहीं बढ़ सकता।”

जमीन पर अतिक्रमण के दूसरे मुद्दे पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को भूमि की स्थिति सत्यापित करने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा:

“राहत संख्या 2 के संदर्भ में अतिक्रमण के आरोपों पर, यदि उक्त भूमि गांव सभा की भूमि या सार्वजनिक उपयोग की भूमि है, तो संबंधित अधिकारी मामले की जांच करेंगे और यदि कोई कारण बनता है, तो वे कानून के अनुसार आवश्यक कार्यवाही करेंगे।”

स्वतः संज्ञान (Suo Motu) कार्यवाही में परिवर्तन

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मुद्दे की गंभीरता को पहचानते हुए, कोर्ट ने निर्धारित किया कि इस मामले में मूल याचिकाकर्ताओं से स्वतंत्र होकर निरंतर न्यायिक निगरानी की आवश्यकता है।

बेंच ने अवलोकन किया:

“संपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए, हमारी राय है कि मामला अब याचिकाकर्ताओं के कहने पर आगे नहीं बढ़ेगा, जिन्होंने पहले ही कोर्ट को इसमें निहित जनहित के बारे में सूचित कर दिया है और अब कोर्ट स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर आगे बढ़ेगा…”

नतीजतन, कोर्ट ने कार्यवाही को स्वतः संज्ञान के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया, जिसका शीर्षक है: In Re: Alleged Illegal Establishment of an Industry by the Opposite Party No. 9 at Village- Chhawan, Tehsil- Sandila, Pargana- Gowda, District- Hardoi and encroachment of Gaon Sabha/public utility land by it.

मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

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