इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में पार्क, खेल मैदान और खुले स्थानों का पूरा विवरण एकत्र कर उनकी सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इस संबंध में 1975 के कानून के तहत जो प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी, वह दशकों बाद भी पूरे राज्य में ठीक से लागू नहीं की गई है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देशित किया कि संबंधित अधिकारी उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान एवं खुले स्थान (संरक्षण और विनियमन) अधिनियम, 1975 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करें।
अदालत ने कहा कि इस अधिनियम के तहत पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों का विवरण एकत्र कर उसे विधिवत सूचीबद्ध करना आवश्यक है। यह सूची अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत तैयार की जानी होती है। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि राज्य के कई हिस्सों में अब तक यह कार्य पूरा नहीं किया गया है।
24 फरवरी के अपने आदेश में अदालत ने कहा, “इस प्रकार के प्रावधान का उद्देश्य स्पष्ट रूप से पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों का संरक्षण और विनियमन सुनिश्चित करना है।”
पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि अधिनियम की धारा 6 के अनुसार, जिन पार्कों, खेल मैदानों या खुले स्थानों को सूची में शामिल किया गया है, उनका उपयोग उस उद्देश्य के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जा सकता जिसके लिए वे पहले से उपयोग में थे, जब तक कि निर्धारित प्राधिकरण से पूर्व अनुमति प्राप्त न कर ली जाए।
यह जनहित याचिका धर्मपाल यादव ने दाखिल की है। याचिका में लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि लखनऊ में मौजूद सभी पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों का सर्वे कराया जाए और उनका विवरण अधिनियम के अनुसार दर्ज किया जाए। इसमें जनेश्वर मिश्र पार्क भी शामिल है।
मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

