इलाहाबाद  हाईकोर्ट ने कहा, सुपारी में तंबाकू मिलाना खाद्य सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन है।

इलाहाबाद  हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि सुपारी में तंबाकू मिलाना खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है और इसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत दंडनीय माना जाएगा। न्यायालय ने तंबाकू युक्त सुपारी के निर्माताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया।

पृष्ठभूमि:

मामला 20 फरवरी, 2020 को जालौन जिले के उरई में स्थित एम/एस बालाजी ट्रेडर्स के निर्माण इकाई में किए गए निरीक्षण से उत्पन्न हुआ। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने “पूजा” ब्रांड के 370 पैकेट “सुगंधित सुपारी” पाए। नमूने लेकर विश्लेषण के लिए भेजे गए, जिससे तंबाकू की उपस्थिति का पता चला।

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के विभिन्न प्रावधानों के तहत निर्माताओं के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की गई। आरोपियों ने इन कार्यवाहियों को रद्द करने की याचिका दायर की, तर्क दिया कि तंबाकू युक्त सुपारी को खाद्य सुरक्षा कानूनों के बजाय तंबाकू नियंत्रण कानूनों के तहत विनियमित किया जाना चाहिए।

मुख्य कानूनी मुद्दे:

1. क्या सुपारी को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत “खाद्य” माना जाता है?

2. क्या सुपारी में तंबाकू मिलाना खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है?

3. ऐसे उत्पादों के लिए तंबाकू नियंत्रण कानून बनाम खाद्य सुरक्षा कानून की प्रासंगिकता।

न्यायालय का निर्णय:

न्यायालय ने आवेदकों के तर्कों को खारिज कर आपराधिक कार्यवाही को बरकरार रखा। मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

1. सुपारी को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 3(1)(zk) के तहत “प्राथमिक खाद्य” माना गया है क्योंकि यह बागवानी से उत्पन्न होती है।

2. खाद्य उत्पादों में तंबाकू मिलाना खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री की रोकथाम और प्रतिबंध) विनियम, 2011 की विनियमन 2.3.4 के तहत निषिद्ध है।

3. तंबाकू युक्त सुपारी “असुरक्षित खाद्य” है क्योंकि इसमें निषिद्ध पदार्थ होता है।

4. सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 अन्य कानूनों के तहत तंबाकू युक्त निम्नस्तरीय या असुरक्षित उत्पादों के लिए अभियोजन को नहीं रोकता।

महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की:

“अधिनियम, 2006 की धारा 3(1)(j) और 3(1)(zk) तथा खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011 की विनियमन 2.3.55 से यह स्पष्ट है कि सुपारी एक प्राथमिक खाद्य उत्पाद है, इसलिए इसे खाद्य की श्रेणी में रखा जाएगा न कि तंबाकू उत्पाद की।”

“खाद्य वस्तु में तंबाकू मिलाना, जिसमें सुपारी भी शामिल है, खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री की रोकथाम और प्रतिबंध) विनियम, 2011 की विनियमन 2.3.4 के अनुसार निषिद्ध है और यह अधिनियम, 2006 की धारा 59 के तहत दंडनीय होगा।”

न्यायालय ने एक पूर्व निर्णय (मनीष गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) को भी खारिज कर दिया, जिसमें ऐसे उत्पादों को तंबाकू उत्पाद के रूप में वर्गीकृत किया गया था, यह कहते हुए कि इसने संबंधित वैधानिक प्रावधानों को नजरअंदाज कर दिया था।

मामले का विवरण:

– न्यायालय: इलाहाबाद  हाईकोर्ट

– मामला संख्या: आवेदन यू/एस 482 नंबर – 11772/2024

– न्यायाधीश: न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल

– आवेदक: जगदीश प्रसाद और अन्य

– विपक्षी पार्टी: उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

– वकील: अमित सिंह (आवेदकों के लिए), राजीव कुमार सिंह (राज्य के लिए)

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