इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा व्यक्तिगत हलफनामे में इस्तेमाल की गई शब्दावली पर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने नोट किया कि अधिकारी ने जिला अदालत के लिए “court below” (निचली अदालत) शब्द का उपयोग किया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपमानजनक मान चुका है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने SP के हलफनामे के तथ्यों को “भ्रामक और विरोधाभासी” करार दिया है।
यह मामला गोलू पांडेय द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। हाईकोर्ट सलीम अंसारी नामक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले की जांच कर रहा था। हाईकोर्ट के पिछले निर्देशों के अनुपालन में, SP कुशीनगर श्री केशव कुमार और थाना तुर्कपट्टी के SHO ने अपने व्यक्तिगत हलफनामे पेश किए थे। इन दस्तावेजों की समीक्षा के बाद, जस्टिस हरवीर सिंह ने SP को एक सप्ताह के भीतर नया व्यक्तिगत हलफनाम पेश कर अपने आचरण और इस्तेमाल की गई “अपमानजनक” भाषा पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन न होने पर SP को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला गोलू पांडेय बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लीकेशन संख्या 45525/2025) से संबंधित है। मामला सलीम अंसारी की मृत्यु से जुड़ा है, जिसे पुलिस ने खुद “संदिग्ध परिस्थितियों” में होना बताया है।
SP कुशीनगर श्री केशव कुमार द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार:
- पैराग्राफ संख्या 6 में कहा गया कि मृतक सलीम अंसारी की मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई।
- पैराग्राफ संख्या 8 में उल्लेख किया गया कि मृत्यु के सटीक कारण का पता नहीं चल सका है।
- पैराग्राफ संख्या 11 में SP ने कहा कि 22 अक्टूबर 2025 को घायल नबी रसूल को एक मेडिकल स्टोर ले जाया गया था, जहाँ सलीम अंसारी भी पहुँचा था और वह “पूरी तरह स्वस्थ (fit)” दिख रहा था।
- इसके बाद, दीपक नामक व्यक्ति सलीम को अस्पताल ले गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।
हाईकोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने SP के हलफनामे की बारीकी से जांच की और इसमें कई विसंगतियां पाईं। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सलीम अंसारी का अस्पताल ले जाने से ठीक पहले “पूरी तरह स्वस्थ” होने का विवरण, हलफनामे के अन्य हिस्सों से मेल नहीं खाता और विरोधाभासी प्रतीत होता है।
विशेष रूप से, हाईकोर्ट ने हलफनामे के पैराग्राफ संख्या 10 में प्रयुक्त भाषा पर आपत्ति जताई, जिसमें लिखा था: “जिस पर विद्वान निचली अदालत (court below) ने 03.01.2026 को अपराध का संज्ञान लिया।”
इस शब्दावली पर हाईकोर्ट ने कहा:
“SP कुशीनगर को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया जाता है कि उन्होंने कानून के किस अधिकार के तहत ऐसी भाषा का उपयोग किया है जो किसी भी अधिकारी द्वारा उपयोग किए जाने पर अपमानजनक प्रतीत होती है। यहाँ तक कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी जिला अदालतों के लिए ‘court below’ शब्द के उपयोग की निंदा की है।”
इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने तथ्यों को पेश करने के तरीके पर भी सवाल उठाए:
“इन परिस्थितियों में, SP कुशीनगर को दाखिल किए गए हलफनामे के संबंध में अपने आचरण को स्पष्ट करने का निर्देश दिया जाता है, जो प्रथम दृष्टया अपने आप में भ्रामक और विरोधाभासी प्रतीत होता है।”
हाईकोर्ट का निर्णय
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SP कुशीनगर को हलफनामे में दी गई जानकारी और प्रयुक्त भाषा के संबंध में “उचित जवाब” दाखिल करने का आदेश दिया है।
- समय सीमा: व्यक्तिगत हलफनामा एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट में पहुँच जाना चाहिए।
- अनुपालन न करने पर परिणाम: यदि हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है, तो SP कुशीनगर श्री केशव कुमार को “इस न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।”
- अगली सुनवाई: मामले को 10 अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
केस विवरण:
- केस शीर्षक: गोलू पांडेय बनाम उत्तर प्रदेश राज्य
- केस संख्या: क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लीकेशन संख्या 45525/2025
- पीठ: जस्टिस हरवीर सिंह
- दिनांक: 25 मार्च 2026
- आवेदक के वकील: सर्वानंद पांडेय
- विपक्षी दल के वकील: अनूप कुमार दुबे (G.A.) और सुधीर तिवारी

