इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की सुरक्षा के लिए कोई विशेष नियमावली बनाई गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जजों के संघ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को पारित किया।
याचिकाकर्ता संघ की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि:
“कम से कम एक रिटायर्ड जज को भी सार्वजनिक रूप से बाहर निकलते समय न्यूनतम सुरक्षा मिलनी चाहिए। एक संवैधानिक पद धारक को, सेवानिवृत्ति के बाद, अपने और अपने परिवार के जीवन की रक्षा के लिए इतनी सुरक्षा तो मिलनी ही चाहिए।”
पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि यदि रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की सुरक्षा को लेकर कोई नियमावली बनी है तो उसे अगली तारीख तक शपथपत्र के साथ प्रस्तुत करें। कोर्ट ने कहा:
“राज्य के अपर महाधिवक्ता रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों के लिए बनाई गई कोई भी प्रासंगिक सुरक्षा नियमावली, यदि हो, तो अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करें। मामले में एक उपयुक्त शपथपत्र दाखिल किया जाए।”
अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को होगी।

