परीक्षा में बैठने का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत गरिमामय जीवन से जुड़ा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि परीक्षा में सम्मिलित होने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रतिष्ठित “मानव गरिमा के साथ जीवन जीने” के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने राज्जू भैया विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह एक छात्रा के लिए दो सप्ताह के भीतर विशेष परीक्षा आयोजित करे, जिसे तकनीकी खामी के कारण एडमिट कार्ड नहीं मिल पाया था।

न्यायमूर्ति विवेक सारन ने 12 जनवरी को पारित आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता छात्रा की कोई गलती नहीं थी और केवल प्रशासनिक तकनीकी त्रुटि के कारण उसका भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि छात्रा ने सभी औपचारिकताएं पूरी की हैं तो परीक्षा में बैठने से वंचित करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।

याचिका दायर करने वाली छात्रा श्रेया पांडेय हैं, जो हंडिया स्थित उर्मिला देवी पीजी कॉलेज में बीएससी बायोलॉजी प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। याचिका में बताया गया कि उन्होंने 16 जुलाई 2025 को समय पर फीस जमा कर दी थी और नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहीं। परंतु जब प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का कार्यक्रम जारी हुआ, तो उन्हें एडमिट कार्ड जारी नहीं किया गया।

दरअसल, विश्वविद्यालय के “समर्थ पोर्टल” पर समय पर उनकी प्रवेश जानकारी अपडेट नहीं हो सकी थी। कॉलेज प्रशासन ने इस त्रुटि के बारे में विश्वविद्यालय को अवगत कराया था और बताया था कि लगभग 30 छात्रों के रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुए हैं। इनमें से 25 छात्रों के रिकॉर्ड बाद में अपडेट कर दिए गए, परंतु याचिकाकर्ता के नहीं हुए, जिसके चलते उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली।

कोर्ट ने पाया कि यह त्रुटि पूर्णतः तकनीकी थी और छात्रा की किसी भी प्रकार की चूक नहीं थी। इसलिए, उसका शैक्षणिक भविष्य संकट में नहीं डाला जा सकता। न्यायालय ने राहुल पांडेय बनाम भारत सरकार (2025) के हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि परीक्षा में बैठना अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है।

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न्यायमूर्ति सारन ने कहा, “परीक्षा में बैठने का अधिकार भी मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार के समान है।” इसके साथ ही कोर्ट ने विश्वविद्यालय को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता के लिए दो सप्ताह के भीतर विशेष परीक्षा आयोजित करे और परिणाम भी यथाशीघ्र घोषित करे ताकि वह आगे की पढ़ाई जारी रख सके।

इसके अलावा, विश्वविद्यालय को निर्देशित किया गया है कि छात्रा के प्रवेश रिकॉर्ड को यथासंभव शीघ्र अपडेट किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

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