इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर एक अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वाहन का पंजीकृत मालिक (Registered Owner) ही कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 के उद्देश्यों के लिए मालिक माना जाएगा, भले ही वाहन को भौतिक रूप से किसी और को बेच दिया गया हो, लेकिन रिकॉर्ड में ट्रांसफर न हुआ हो। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा कि आईएमटी-29 (IMT-29) के तहत लिया गया प्रीमियम वेतनभोगी ड्राइवर (Paid Driver) की देयता को कवर करता है।
न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने कर्मचारी मुआवजा आयुक्त के फैसले को बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी को मृतक ड्राइवर के परिवार को मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह अपील कर्मचारी मुआवजा आयुक्त/उप श्रम आयुक्त, मुरादाबाद द्वारा पारित 3 नवंबर, 2025 के निर्णय और अवार्ड के खिलाफ दायर की गई थी। मामला धरमवीर नामक एक ड्राइवर की मृत्यु से संबंधित था, जो क्वालिस कार (सं. UA-07-C-6274) पर कार्यरत था। 26 फरवरी, 2015 को रोजगार के दौरान एक सड़क दुर्घटना में धरमवीर की मृत्यु हो गई थी।
आयुक्त ने दावेदारों को 12% वार्षिक ब्याज के साथ 8,26,495 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था और बीमा कंपनी को इस राशि की क्षतिपूर्ति करने का निर्देश दिया था। इस आदेश से असंतुष्ट होकर बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अपीलकर्ता की दलीलें
अपीलकर्ता-बीमा कंपनी के वकील श्री अखिलेश शरण श्रीवास्तव ने मुख्य रूप से दो तर्क प्रस्तुत किए:
- स्वामित्व का हस्तांतरण: बीमा पॉलिसी राकेश नामक व्यक्ति द्वारा ली गई थी, लेकिन दुर्घटना से पहले वाहन निर्दोष कुमार को बेच दिया गया था। यद्यपि पॉलिसी ट्रांसफर नहीं की गई थी, लेकिन वाहन का कब्जा निर्दोष कुमार के पास था। इसलिए, यह तर्क दिया गया कि मृतक और बीमित व्यक्ति (राकेश) के बीच मालिक और सेवक (Master and Servant) का कोई संबंध नहीं था, और इस प्रकार अपीलकर्ता के खिलाफ कोई मुआवजा नहीं दिया जा सकता।
- पॉलिसी का दायरा: यह प्रस्तुत किया गया कि बीमा कंपनी ने “उक्त वाहन के ड्राइवर का बीमा करने के लिए कोई प्रीमियम नहीं लिया था,” और इसलिए वह मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।
कोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणियाँ
1. पंजीकृत मालिक का दायित्व
न्यायमूर्ति संदीप जैन ने स्वामित्व के हस्तांतरण के संबंध में बीमा कंपनी के तर्क को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने पाया कि दुर्घटना की तारीख पर राकेश ही पंजीकृत मालिक था, और वाहन को किसी तीसरे पक्ष (श्रीमती जयकारी देवी) को 6 जुलाई, 2016 को हस्तांतरित किया गया था, जो दुर्घटना के बाद की तारीख थी।
कोर्ट ने पुष्पा @ लीला और अन्य बनाम शकुंतला और अन्य (2011) और बृज बिहारी गुप्ता बनाम मनमीत और अन्य (2025) में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भरोसा जताया। कोर्ट ने नोट किया कि “जब दुर्घटना से पहले वाहन के स्वामित्व का हस्तांतरण किया गया था, लेकिन न तो हस्तांतरणकर्ता और न ही transferee ने पंजीकरण प्रमाण पत्र में मालिक का नाम बदलने के लिए कोई कदम उठाया… तो अधिनियम के प्रयोजनों के लिए हस्तांतरणकर्ता को ही वाहन का मालिक माना जाना चाहिए।”
बृज बिहारी गुप्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को उद्धृत करते हुए, हाईकोर्ट ने कहा:
“भुगतान करने का दायित्व पूरी तरह से पंजीकृत मालिक पर आता है, भले ही लगातार हस्तांतरण हुए हों, जिसकी क्षतिपूर्ति बीमाकर्ता द्वारा की जानी है।”
2. आईएमटी-29 (IMT-29) के तहत कवरेज
वेतनभोगी ड्राइवर के कवरेज के संबंध में, कोर्ट ने बीमा पॉलिसी की जांच की। यह पाया गया कि वाहन का बीमा “केवल निजी कार देयता पॉलिसी” (Private Car Liability Only Policy) के तहत किया गया था। कोर्ट ने नोट किया कि बीमाकर्ता ने आईएमटी-29 (कर्मचारियों के प्रति कानूनी दायित्व) के तहत प्रीमियम के रूप में 50 रुपये चार्ज किए थे।
कोर्ट ने कहा:
“यह स्पष्ट है कि आईएमटी-29 के तहत केवल 25 रुपये प्रति कर्मचारी का प्रीमियम लिया जाता है, लेकिन मौजूदा मामले में, बीमा कंपनी ने दो व्यक्तियों का प्रीमियम लिया है, जो यह साबित करता है कि ड्राइवर भी तत्काल बीमा पॉलिसी के तहत कवर किया गया था।”
कोर्ट ने आगे तर्क दिया कि चूंकि दुर्घटनाग्रस्त वाहन एक निजी कार थी, इसलिए इसे चलाने के लिए ड्राइवर की आवश्यकता होती है, न कि वाणिज्यिक ट्रकों की तरह जिनमें कंडक्टर या क्लीनर भी हो सकते हैं। इसलिए, कर्मचारियों के लिए लिया गया प्रीमियम अनिवार्य रूप से वेतनभोगी ड्राइवर को शामिल करता है।
पीठ ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा 18 अक्टूबर, 2023 को जारी परिपत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें सामान्य बीमाकर्ताओं को आईएमटी-29 के तहत नियोक्ता के वाहन में यात्रा करने वाले कर्मचारियों (वेतनभोगी ड्राइवरों सहित) को इनबिल्ट कवरेज प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।
निर्णय
कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अपील में कानून का कोई भी ठोस प्रश्न (Substantial Question of Law) शामिल नहीं है। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने अपील को खारिज करते हुए कहा:
“बीमा कंपनी द्वारा लिए गए उपरोक्त प्रीमियम के मद्देनजर, जो बीमित व्यक्ति के दो कर्मचारियों के लिए था, जिसमें कार का वेतनभोगी ड्राइवर भी शामिल था, इसलिए इसके विपरीत अपीलकर्ता के विद्वान वकील की दलील खारिज किए जाने योग्य है।”
कोर्ट ने नोट किया कि बीमा कंपनी पहले ही 2 जनवरी, 2016 को ब्याज सहित मुआवजे की राशि 17,94,718 रुपये जमा कर चुकी है। कोर्ट ने आयुक्त को निर्देश दिया कि वह निर्णय के अनुसार दावेदारों को उक्त राशि वितरित करें।
केस विवरण:
- केस टाइटल: ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम रामचंद्रपाल सिंह और 5 अन्य
- केस नंबर: फर्स्ट अपील फ्रॉम ऑर्डर (FAFO) संख्या 130 ऑफ 2026
- कोरम: न्यायमूर्ति संदीप जैन

