इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि पासपोर्ट का नवीनीकरण कराना नागरिक का एक “वैध अधिकार” है, जिसे न्यायिक अधिकारी केवल किसी डर या आशंका के आधार पर नहीं रोक सकते। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होना, उसे कानूनी कार्यवाही में शामिल होने के लिए यात्रा दस्तावेज नवीनीकृत कराने से रोकने का आधार नहीं हो सकता।
यह निर्णय न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने रामपुर निवासी दिलीप द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। हाईकोर्ट ने रामपुर के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) के 30 जुलाई, 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता के पासपोर्ट नवीनीकरण की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता दिलीप वर्तमान में सऊदी अरब में रह रहे हैं। उनके खिलाफ रामपुर में एक आपराधिक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था।
दिलीप इस मामले में रामपुर की संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण और कार्यवाही में शामिल होना चाहते थे। भारत लौटने के लिए उन्हें एक वैध पासपोर्ट की आवश्यकता थी, क्योंकि उनका पुराना पासपोर्ट समाप्त (Expire) हो चुका था। जब उन्होंने नवीनीकरण की अनुमति के लिए ACJM की अदालत में आवेदन किया, तो इसे खारिज कर दिया गया। इस फैसले के कारण दिलीप का भारत लौटकर ट्रायल का सामना करना असंभव हो गया था।
निचली अदालत के इस आदेश को दिलीप ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट में चुनौती दी और न्याय की गुहार लगाई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने निचली अदालत के तर्क की समीक्षा की। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि किसी नागरिक को उसके आचरण के प्रति केवल आशंका या डर के आधार पर पासपोर्ट के अधिकार से वंचित करना कानूनी रूप से उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ता खुद भारत लौटकर कोर्ट के सामने पेश होना चाहते हैं। पासपोर्ट का नवीनीकरण न होने देना उनके आत्मसमर्पण और कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने के मार्ग में एक बाधा की तरह है।
हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, “पासपोर्ट का नवीनीकरण एक वैध अधिकार है जो किसी व्यक्ति को उपलब्ध है, इसे केवल चिंता और भय के आधार पर नहीं रोका जा सकता है।”
हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया कि बिना किसी देरी के याचिकाकर्ता के पासपोर्ट का नवीनीकरण किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि एक वैध यात्रा दस्तावेज रखना नागरिक के लिए अनिवार्य है ताकि वह अपने कानूनी दायित्वों को पूरा कर सके, विशेष रूप से तब जब वह विदेश में हो। इस आदेश के बाद अब याचिकाकर्ता के लिए भारत लौटने और अपने खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट का सामना करने का रास्ता साफ हो गया है।

