इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह पतंगबाजी के मौजूदा मौसम में चीनी मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी ढंग से रोक सुनिश्चित करे।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने कहा कि सरकार को इस विषय में पहले से दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। कोर्ट ने दोटूक कहा कि चीनी मांझा न केवल इंसानों बल्कि पक्षियों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा है।
यह आदेश हिमांशु श्रीवास्तव व अन्य दो याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें चीनी मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
याचिका में बताया गया कि हाईकोर्ट ने इस विषय पर 19 नवम्बर 2015 को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह चीनी मांझे के निर्माण, उपयोग और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए सभी उपयुक्त कदम उठाए। इसके बाद भी कोर्ट को इस विषय में कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा है।
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि पतंगबाजी के त्योहार जैसे मकर संक्रांति के दौरान यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जब मांझे से दुर्घटनाएं और पक्षियों को नुकसान की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
अंत में कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को पहले दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया।

