इलाहाबाद हाई कोर्ट में भगौड़ा घोषित आईपीएस मणिलाल की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

प्रयागराज—– इलाहाबाद हाई कोर्ट से भगौड़ा घोषित महोबा के पूर्व पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सवालों के घेरे में आ गई है,किंतु हाई कोर्ट ने सरकार की अनुपालन रिपोर्ट समेत एफिडेविट को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है। कोर्ट की सुनवाई के दौरान हलफनामा रिकॉर्ड पर नही था। 

उक्त आदेश जस्टिस बचचुलाल एंव जस्टिस संजय कुमार पचौरी की खंडपीठ ने याचिका दाखिल करने वाले वकील और अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व अपर शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार की दलीलों को सुनकर दिया। 

कोर्ट ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता से उसका लोकेशन पूछा तो उन्होंने खुद को मणिलाल पाटीदार का पक्षकार अधिवक्ता बताया। वकालतनामें के बारे में पूछे जाने पर मोबइल फोन से संपर्क की बात कही गई। 

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मणिलाल के परिजनों के मुताबिक उन्होंने इस वकील को अधिवक्ता नियुक्त किया है। कोर्ट ने इस बाबत सरकार से पूर्व आदेशो के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने बताया गया कि आइपीएस मणिलाल को भगौड़ा घोषित कर उंसके विरुद्ध आईपीसी की धारा 174(ए) का केस दर्ज किया गया है। साथ ही उसकी कुर्की का आदेश भी प्राप्त कर लिया गया है। 

यह भी बताया गया है कि याचिका में जिन मोबाइल नंबरों से संपर्क करने का हवाला है ,उनमे से एक व्हाट्सएप पर मौजूद नही है,और दूसरे में व्हाट्सएप संपर्क के काफी देर बाद डाउनलोड हुआ। कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता से सरकार की रिपोर्ट के संबंध में पूछा तो उन्होंने जवाब दाखिल करने की बात कही,लेकिन वह कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड पर नही था। इस पर कोर्ट ने संबंधित अनुभाग से उनका जवाब रिकॉर्ड पर लाने को कहा है। 

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