इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रैफिक जाम को लेकर ला मार्टिनियर, लोरेटो, सीएमएस और जयपुरिया के प्रिंसिपल्स को तलब किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने शहर में ट्रैफिक जाम और नागरिक समस्याओं से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए लखनऊ के छह प्रमुख शिक्षण संस्थानों को पक्षकार (Respondent) बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इन स्कूलों के प्रिंसिपल्स या वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को 19 जनवरी, 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और अपने परिसर के आसपास ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का आदेश दिया है।

गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने स्कूल के घंटों के दौरान लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम के मुद्दे पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने पाया कि पिछले प्रयासों और निर्देशों के बावजूद, कुछ संस्थानों ने स्थिति को सुधारने के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठाए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप, कोर्ट ने ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज, लोरेटो कॉन्वेंट, सिटी मोंटेसरी स्कूल (सीएमएस) की तीन शाखाओं और सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

पृष्ठभूमि और दलीलें

यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL No. 3436 of 2020) की सुनवाई के दौरान पारित किया गया।

सुनवाई के दौरान, न्यायमित्र (Amicus Curiae) अधिवक्ता अभिनव भट्टाचार्य और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता (AAG) सुदीप कुमार ने संयुक्त रूप से कोर्ट को सूचित किया कि वे ट्रैफिक स्थिति को सुधारने के लिए नियमित रूप से विभिन्न संस्थानों के संपर्क में हैं, विशेष रूप से स्कूल खुलने और बंद होने के समय।

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कोर्ट को बताया गया कि जहां कुछ स्कूलों ने निर्देशों का पालन किया है और वहां की स्थिति में काफी सुधार हुआ है, वहीं कुछ अन्य संस्थानों ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। वकीलों ने कोर्ट के समक्ष कहा:

“कुछ संस्थानों ने ट्रैफिक स्थिति को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।”

इसके बाद कोर्ट से इन विशिष्ट संस्थानों को पक्षकार बनाने की प्रार्थना की गई ताकि कोई भी आगे का आदेश पारित करने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर दिया जा सके।

कोर्ट का विश्लेषण और निर्देश

खंडपीठ ने इस बात पर गौर किया कि न्यायमित्र और राज्य सरकार के प्रयासों के बावजूद, चिन्हित संस्थानों ने ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की:

“जिसके कारण आम जनता को परेशानी हो रही है।”

कानूनी प्रक्रिया में इन स्कूलों की भागीदारी की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, हाईकोर्ट ने उन्हें प्रतिवादी बनाने की अनुमति दी।

इन स्कूलों को बनाया गया पक्षकार:

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निम्नलिखित छह संस्थानों को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया गया है:

  1. ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज, हजरतगंज, लखनऊ
  2. लोरेटो कॉन्वेंट, गौतमपल्ली, लखनऊ
  3. सिटी मोंटेसरी स्कूल, गोमती नगर (विशाल खंड), लखनऊ
  4. सिटी मोंटेसरी स्कूल, गोमती नगर विस्तार परिसर, लखनऊ
  5. सिटी मोंटेसरी स्कूल, स्टेशन रोड, लखनऊ
  6. सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, गोमती नगर, लखनऊ

जारी किए गए निर्देश

हाईकोर्ट ने नए पक्षकार बनाए गए संस्थानों को विशिष्ट निर्देश जारी किए हैं:

  • पुराने आदेशों का अध्ययन करें: संस्थानों को कोर्ट के पिछले निर्देशों, विशेष रूप से 23 अगस्त, 2024 को पारित आदेश का अध्ययन करना होगा, जिसमें ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विभिन्न सुझाव दिए गए थे।
  • व्यक्तिगत उपस्थिति: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तारीख, 19 जनवरी, 2026 को “संबंधित स्कूलों के प्रिंसिपल/वरिष्ठ संकाय या प्रशासनिक अधिकारी इस कोर्ट में उपस्थित रहेंगे।”
  • कार्य योजना: स्कूल प्रतिनिधियों को कोर्ट को यह बताना होगा कि उन्होंने ट्रैफिक स्थिति के संबंध में क्या कदम उठाए हैं और सुधार के लिए अपने सुझाव भी देने होंगे।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पहली बार में, वह स्थिति को सुधारने की जिम्मेदारी संस्थानों पर छोड़ रही है। हालांकि, कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा:

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“विफल रहने पर इस कोर्ट द्वारा राज्य के अधिकारियों और विद्वान न्यायमित्र द्वारा विशेष स्कूलों के आसपास की पूरी ट्रैफिक स्थिति का अध्ययन करने के बाद आवश्यकतानुसार और सुझाव के अनुसार निर्देश जारी किए जाएंगे।”

इसके अलावा, एएजी सुदीप कुमार ने लिखित निर्देशों के आधार पर कोर्ट को सूचित किया कि स्कूलों के निरीक्षण के लिए एजेंसी को नियुक्त करने के नियमों और शर्तों में पहले से ही प्रावधान मौजूद हैं, इसलिए किसी नई शर्त को जोड़ने की आवश्यकता नहीं है।

मामले का विवरण:

  • केस टाइटल: गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स जरिए सचिव गिरधर गोपाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य
  • केस संख्या: जनहित याचिका (PIL) संख्या 3436 ऑफ 2020
  • कोरम: जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस बृज राज सिंह
  • याचिकाकर्ता के वकील: देवक वर्धन, अभिनव भट्टाचार्य (न्यायमित्र)
  • प्रतिवादी के वकील: सी.एस.सी., अखिलेश कुमार कालरा, आनंद कुमार कौशल, चंद्र भूषण पांडे, राज कुमार सिंह, रत्नेश चंद्रा, शैलेंद्र सिंह चौहान, सिद्धार्थ लाल वैश, सुधांशु चौहान, तुषार मित्तल, विनय सिंह

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