इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने आजम खान की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान की कानूनी मुश्किलों से जुड़ी एक अहम खबर इलाहाबाद हाईकोर्ट से सामने आई है। शुक्रवार को हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति समीर जैन ने रामपुर के चर्चित यतीम खाना विध्वंस मामले में दाखिल आजम खान की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और खुद को इस केस से अलग (recuse) कर लिया।

मामले को रिलीज करते हुए न्यायमूर्ति जैन ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा अंतिम फैसला सुनाने पर जो अंतरिम रोक पहले लगाई गई थी, वह अगली सुनवाई की तारीख तक प्रभावी रहेगी।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 15 अक्टूबर 2016 की एक कथित घटना से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि रामपुर में वक्फ संपत्ति संख्या 157, जिसे यतीम खाना के नाम से जाना जाता है, पर बने अनधिकृत निर्माणों को जबरन ध्वस्त कराया गया था। इस घटना के संबंध में 2019 और 2020 के बीच कोतवाली पुलिस स्टेशन, रामपुर में लगभग 12 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं।

पुलिस जांच में आजम खान और कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। इन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत डकैती, गृह अतिचार (house trespass) और आपराधिक साजिश रचने जैसी गंभीर धाराओं में आरोप लगाए गए हैं। 8 अगस्त 2024 को रामपुर के विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) ने इन सभी मुकदमों को एक साथ जोड़ते हुए इसे ‘स्पेशल केस नंबर 45 ऑफ 2020’ के रूप में चलाने का आदेश दिया था।

READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों में शौचालय सुविधाओं के निरीक्षण का आदेश दिया, जिसमें कहा गया कि शौचालयों की स्थिति बहुत खराब है

हाईकोर्ट में क्यों आई याचिका?

आजम खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के 30 मई के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी दो प्रमुख मांगों को खारिज कर दिया गया था:

  1. अभियोजन पक्ष के गवाहों, विशेष रूप से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर अहमद फारुकी को जिरह के लिए वापस (recall) बुलाना।
  2. 2016 की विध्वंस कार्रवाई के वीडियो फुटेज को साक्ष्य के तौर पर पेश करने की अनुमति।
READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट ने विधायक करतार सिंह तंवर की अयोग्यता याचिका पर स्पीकर कार्यालय से जवाब मांगा

आवेदकों का तर्क है कि जफर अहमद फारुकी ने इस वीडियो साक्ष्य की जानकारी को स्वीकार किया था। बचाव पक्ष का कहना है कि यह वीडियो एक महत्वपूर्ण सबूत है, जो यह साबित कर सकता है कि कथित घटना के वक्त आरोपी मौके पर मौजूद नहीं थे, जिससे वे बेगुनाह साबित हो सकते हैं।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

अधिवक्ता शाश्वत गिरी के अनुसार, यह मामला न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। वर्तमान रोस्टर के तहत, न्यायमूर्ति जैन सांसदों और विधायकों (MP/MLA) के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए अधिकृत हैं। शुक्रवार को जब दलीलें पेश की जा रही थीं, तभी न्यायमूर्ति ने सुनवाई को बीच में रोकते हुए खुद को इस मामले से अलग करने का निर्णय लिया।

अब यह मामला मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित किसी अन्य पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

READ ALSO  कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आप पार्टी के मंत्री सत्येंद्र जैन की ईडी हिरासत 13 जून तक बढ़ाई

राहत जारी रहेगी

भले ही जज ने खुद को मामले से अलग कर लिया हो, लेकिन उन्होंने आवेदकों के हितों को सुरक्षित रखा है। इससे पहले 11 जून को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि ट्रायल कोर्ट में मुकदमे की कार्यवाही तो चल सकती है, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया जाएगा। शुक्रवार को अपने आदेश में न्यायमूर्ति जैन ने इस निर्देश को अगली तारीख तक के लिए बढ़ा दिया है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles