5 माह की बच्ची से दुष्कर्म व हत्या: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फांसी घटाकर आजीवन कारावास दिया, रिमिशन पर पूरी तरह रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को 5 माह की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी की फांसी की सज़ा को कम करते हुए उसे आजीवन कारावास में बदल दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि दोषी शेष जीवन जेल में ही बिताएगा और उसे किसी भी प्रकार की रिमिशन (सज़ा में कटौती) नहीं दी जाएगी।

न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति राजीव सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला सेशन कोर्ट से भेजी गई डेथ रेफरेंस और दोषी प्रेमचंद उर्फ पप्पू दीक्षित की अपील पर सुनवाई के बाद सुनाया। सेशन कोर्ट ने 30 सितंबर 2021 को उसे मौत की सज़ा सुनाई थी।

पीठ ने माना कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि का फैसला बिल्कुल सही था। घटनास्थल से आरोपी की शर्ट का बटन और उसके तीन बाल मिलने से अभियोजन का मामला मज़बूती से साबित होता है।

हालांकि, सज़ा को मौत से आजीवन कारावास में बदलते हुए कोर्ट ने कहा कि दोषी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और वह स्वयं भी 3-4 वर्ष के बच्चे का पिता है। अदालत ने यह भी नोट किया कि अपराध को पूर्व नियोजित साबित करने वाला कोई साक्ष्य रिकॉर्ड में नहीं है, इसलिए यह मामला ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी में नहीं आता।

घटना 16 फरवरी 2020 को मड़ियांव थाना क्षेत्र में हुई थी। बच्ची अपने माता-पिता के साथ एसआर मैरिज लॉन में आयोजित एक शादी में आई थी, जहां उसका चचेरा भाई प्रेमचंद उर्फ पप्पू दीक्षित भी मौजूद था। वह बच्ची को उसकी मां की गोद से “खिलाने” के बहाने लेकर गया और वापस नहीं आया। काफी देर बाद परिजनों ने तलाश शुरू की।

बच्ची कुछ दूरी पर झाड़ियों में गंभीर अवस्था में मिली। उसे तत्काल केजीएमयू ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

अदालत ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सज़ा में बदलाव किया और कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को शेष जीवन जेल में ही रहना होगा तथा उसे किसी प्रकार की रिमिशन नहीं मिलेगी।

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