प्रयागराज में माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या पर स्नान करने जा रहे शंकराचार्य परंपरा के संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके अनुयायियों को रोके जाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक पत्र याचिका दायर की गई है। याचिका में 18 जनवरी 2026 को हुए इस कथित घटनाक्रम की CBI जांच कराने और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
एडवोकेट गौरव द्विवेदी द्वारा दाखिल इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वामी जी जब अपने अनुयायियों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने उनकी पालकी को जबरन रोक दिया और उन्हें पैदल जाने के लिए मजबूर किया। इससे विवाद की स्थिति बनी, पालकी को क्षति पहुंची, धार्मिक अनुष्ठान बाधित हुए और अनुयायियों से हाथापाई हुई।
याचिका में यह भी आरोप है कि इस दौरान 11 से 14 वर्ष की उम्र के ब्राह्मण बाल ब्रह्मचारियों (बटुकों) को अवैध रूप से हिरासत में लेकर उनके साथ पुलिस कस्टडी में मारपीट की गई, जो जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 का सीधा उल्लंघन है।
याचिका में अदालत से निवेदन किया गया है कि वह उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दे कि प्रयागराज के कमिश्नर, जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और मेला अधिकारी को तत्काल निलंबित कर उनके स्थान पर नए अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि निष्पक्ष प्रशासन सुनिश्चित किया जा सके।
इसके साथ ही गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), प्रयागराज कमिश्नर, डीएम, पुलिस कमिश्नर और मेला अधिकारी को मामले में प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि मौनी अमावस्या माघ मेले का सबसे पवित्र स्नान दिवस होता है और ऐसे अवसर पर प्रशासन की मनमानी कार्यवाही सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
यह पत्र याचिका हाईकोर्ट के समक्ष नियमित सूची में सुनवाई के लिए रखी जाएगी।

