इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किसी वकील को एक बार सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (COP) जारी होने के बाद क्या उसकी वकालत करने की जगह बदलकर नया प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि यदि ऐसा संभव है, तो इसके लिए नियमों में कोई समयसीमा निर्धारित है या नहीं।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने आगामी अवध बार एसोसिएशन चुनाव में मतदान के लिए पात्र पाए गए 5,108 वकीलों का विवरण भी बार काउंसिल से मांगा है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की डिवीजन बेंच ने 14 अक्टूबर 2026 को गिरधारी लाल यादव की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने स्वयं अपना पक्ष रखा, जबकि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से एडवोकेट सुभाष चंद्र पांडे पेश हुए।
वकालत की जगह बदलने पर COP के नियमों को लेकर सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बार काउंसिल के वकील सुभाष चंद्र पांडे को संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई पर जवाब देने को कहा।
बेंच ने पूछा कि सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015 के तहत एक बार COP जारी होने के बाद क्या उसमें वकालत करने की जगह बदलकर दोबारा प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है?
कोर्ट ने कहा,
“यह बताया जाए कि सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015 के तहत एक बार जारी किए गए COP को वकालत की जगह बदलने के बाद दोबारा जारी किया जा सकता है या नहीं।”
हाईकोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि यदि नियमों के तहत ऐसा करने की अनुमति है, तो क्या इसके लिए कोई निश्चित अवधि तय की गई है।
इसके साथ ही कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया।
बेंच ने पूछा कि COP में जिस बार एसोसिएशन का उल्लेख मतदान का अधिकार इस्तेमाल करने के लिए किया गया है, क्या उसे भी बदला जा सकता है?
कोर्ट ने निर्देश दिया,
“यह भी बताया जाए कि COP में जिस बार एसोसिएशन का उल्लेख मतदान का अधिकार इस्तेमाल करने के लिए किया गया है, क्या उसे बदला जा सकता है और यदि हां, तो कितनी अवधि के भीतर ऐसा किया जा सकता है।”
अवध बार एसोसिएशन के 5,108 मतदाताओं का विवरण मांगा
हाईकोर्ट ने आगामी अवध बार एसोसिएशन चुनाव की मतदाता सूची को लेकर भी निर्देश जारी किए।
कोर्ट को बताया गया कि चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर ने मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया है और इसमें 5,108 सदस्यों को मतदान के लिए पात्र पाया गया है।
बेंच ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन सभी मतदाताओं का विवरण कोर्ट के रिकॉर्ड पर पेश करने का निर्देश दिया।
इसके लिए हाईकोर्ट ने अवध बार एसोसिएशन चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर को निर्देश दिया कि वह पात्र पाए गए सभी 5,108 सदस्यों के नामों वाली सूची की एक प्रति एडवोकेट सुभाष चंद्र पांडे को उपलब्ध कराएं।
इसके बाद बार काउंसिल की ओर से इन सदस्यों का संबंधित विवरण कोर्ट के सामने रखा जाएगा।
पहले जारी COP में हुए बदलावों का भी देना होगा विवरण
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी वकील को पहले जारी किए गए COP में कोई बदलाव किया गया है या उसका प्रमाणपत्र दोबारा जारी किया गया है, तो उससे संबंधित जानकारी भी अगली सुनवाई पर प्रस्तुत की जाए।
इसके तहत बार काउंसिल को COP में हुए बदलावों और दोबारा जारी किए गए प्रमाणपत्रों का विवरण कोर्ट के सामने रखना होगा।
22 अक्टूबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है।
इस जनहित याचिका को रिट-सी संख्या 5189/2025 और जनहित याचिका संख्या 995/2026 के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
केस डिटेल्स
- केस टाइटल: गिरधारी लाल यादव बनाम उत्तर प्रदेश बार काउंसिल, अध्यक्ष/सचिव के माध्यम से, प्रयागराज एवं अन्य
- केस नंबर: जनहित याचिका संख्या 996/2026
- बेंच: जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला
- आदेश की तारीख: 14 अक्टूबर 2026
