भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायपालिका के खिलाफ सार्वजनिक बयानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले के विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने हालांकि दोनों पक्षों को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने से राहत प्रदान की। पीठ ने स्पष्ट किया कि आगे का कोई भी निर्णय लेने से पहले वह दोनों के लिखित जवाबों पर विचार करेगी। अदालत ने कहा कि फिलहाल केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है और व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जा रही है।
सुनवाई के दौरान न्यायपालिका को निशाना बनाए जाने वाले बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालतें हमेशा नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर रही हैं, ऐसे में इस संस्था पर अनुचित हमले होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
एससीबीए की याचिका और अटॉर्नी जनरल की मंजूरी
यह अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा दायर की गई थी। एससीबीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा कि राउत और वागले की टिप्पणियां निष्पक्ष आलोचना के दायरे को पार कर चुकी हैं और इससे देश की शीर्ष अदालत के प्रति आम जनता के विश्वास को ठेस पहुंचने का खतरा है। बार एसोसिएशन ने दोनों प्रतिवादियों को व्यक्तिगत रूप से तलब करने का अनुरोध किया था, जिसे पीठ ने स्वीकार नहीं किया।
इस कानूनी प्रक्रिया से पहले अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(1)(बी) के तहत आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनिवार्य औपचारिक मंजूरी दी थी। एससीबीए ने यह याचिका 15 अक्टूबर को दाखिल की थी और उसी दिन अटॉर्नी जनरल ने भी अपनी सहमति दे दी थी।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सीजेआई सूर्यकांत ने विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल से व्यक्तिगत मुलाकात के आग्रह को स्वीकार करने से मना कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने उस समय सुझाव दिया था कि संबंधित मामले या शिकायत को अनौपचारिक बातचीत के बजाय याचिका के रूप में औपचारिक तौर पर अदालत के समक्ष लाया जाना चाहिए।
एससीबीए की याचिका के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद निखिल वागले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सीजेआई को निशाना बनाते हुए कथित रूप से एक आपत्तिजनक पोस्ट साझा की थी, जिसे बाद में उन्होंने हटा लिया था। याचिका में संजय राउत द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को भी अदालत के संज्ञान में लाया गया है।

