पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक कारोबारी की हत्या के मामले में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को उसके परिवार को चार बीमा पॉलिसियों के तहत करीब 26.50 लाख रुपये का अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ देने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर बीमा क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता कि पॉलिसीधारक की हत्या पहले से बनाई गई योजना के तहत की गई थी।
आयोग के न्यायिक सदस्य एचपीएस महल और सदस्य किरण सिब्बल की बेंच ने कहा कि जब इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मृतक ने हमलावरों को उकसाया था या हत्या की परिस्थितियां पैदा करने में उसकी कोई भूमिका थी, तो बीमा कंपनी सिर्फ हत्या की पूर्व योजना का हवाला देकर अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ देने से इनकार नहीं कर सकती।
13 अक्टूबर को दिए गए फैसले में आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग, मोगा के 29 नवंबर 2022 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही LIC को 30 अप्रैल 2021 से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ बीमा राशि देने का निर्देश दिया। आयोग ने परिवार को मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए कुल 50,000 रुपये देने का भी आदेश दिया।
दुकान पर हुई थी कारोबारी की हत्या
मोगा के कारोबारी तजिंदर सिंह कंबो की 14 जुलाई 2020 को उनकी दुकान पर अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी।
तजिंदर सिंह ने LIC की चार बीमा पॉलिसियां ले रखी थीं, जिनकी बीमित राशि क्रमशः 5 लाख, 10 लाख, 1.60 लाख और 10 लाख रुपये थी। चारों पॉलिसियों में उनकी पत्नी रिपनदीप कौर कंबो नॉमिनी थीं।
हत्या के बाद LIC ने पॉलिसियों के तहत सामान्य मृत्यु बीमा राशि का भुगतान कर दिया, लेकिन अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ (डबल एक्सीडेंट बेनिफिट) देने से इनकार कर दिया।
30 अप्रैल 2021 को जारी क्लेम खारिज करने के पत्र में LIC ने कहा कि कारोबारी की हत्या अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसे पहले से योजना बनाकर अंजाम दिया गया था।
बीमा कंपनी ने सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह उर्फ सुखा गिल लम्मे ने इलाके में दहशत फैलाने के लिए हत्या करवाई थी।
LIC के इस फैसले को कारोबारी की पत्नी, नाबालिग बेटे और मां ने जिला उपभोक्ता आयोग, मोगा में चुनौती दी। हालांकि, जिला आयोग ने 29 नवंबर 2022 को उनकी शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद परिवार ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की।
मृतक ने हमलावरों को उकसाया था, इसका कोई सबूत नहीं
सुनवाई के दौरान परिवार ने दलील दी कि तजिंदर सिंह का कथित गैंगस्टरों की गतिविधियों से कोई संबंध साबित नहीं हुआ था। ऐसा भी कोई सबूत नहीं था जिससे पता चले कि उन्होंने हमलावरों को उकसाया था।
परिवार ने LIC के 15 अक्टूबर 2007 के एक सर्कुलर का भी हवाला दिया, जिसमें हत्या से जुड़े मामलों में अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ देने के संबंध में निर्देश दिए गए थे।
दूसरी ओर, LIC ने कथित हमलावर की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा जताया। कंपनी का कहना था कि इस पोस्ट से मृतक और आरोपी के बीच विवाद होने का संकेत मिलता है।
लेकिन राज्य आयोग ने पाया कि कथित विवाद की पुष्टि न तो एफआईआर से होती है और न ही डीएसपी, सिटी मोगा की रिपोर्ट से।
आयोग ने यह भी पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं था जिससे यह साबित हो कि हत्या से पहले आरोपियों ने तजिंदर सिंह को धमकी दी थी या उनके बीच किसी तरह का संपर्क हुआ था।
योजनाबद्ध हत्या और दुर्घटना बीमा का सवाल अलग-अलग
आयोग ने कहा कि हमलावरों का हत्या करने का इरादा होना और बीमा पॉलिसी के तहत मृतक की मौत को दुर्घटनात्मक माना जाना दो अलग-अलग सवाल हैं।
आयोग के अनुसार, केवल यह साबित होना कि अपराध पहले से योजना बनाकर किया गया था, अपने आप में अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
आयोग ने LIC के 15 अक्टूबर 2007 के सर्कुलर का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पुलिस रिकॉर्ड से यह सामने नहीं आता कि मृतक ने खुद हत्या के लिए उकसाया था या उसकी इसमें कोई भूमिका थी, तो हत्या के मामले में दुर्घटना बीमा लाभ नहीं रोका जाना चाहिए।
इस मामले में LIC ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी जिससे यह साबित होता कि तजिंदर सिंह की मौत बीमा पॉलिसियों के दायरे से बाहर थी।
इसके अलावा, बीमा कंपनी पॉलिसी की ऐसी कोई शर्त भी नहीं दिखा सकी जिसके आधार पर इस परिस्थिति में अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ देने से इनकार किया जा सकता था।
आयोग ने माना कि LIC ने केवल हत्या को पहले से योजनाबद्ध बताकर क्लेम खारिज किया, जबकि इसके समर्थन में पर्याप्त आधार मौजूद नहीं थे।
6 प्रतिशत ब्याज के साथ बीमा राशि देने का आदेश
राज्य उपभोक्ता आयोग ने परिवार की अपील स्वीकार करते हुए जिला आयोग का फैसला रद्द कर दिया और LIC की कार्रवाई को सेवा में कमी माना।
आयोग ने LIC को चारों पॉलिसियों के तहत अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ का भुगतान करने का निर्देश दिया।
मामले में अतिरिक्त बीमा लाभ की राशि करीब 26.50 लाख रुपये बताई गई, जबकि परिवार ने 26.60 लाख रुपये का दावा किया था। हालांकि, आयोग ने अपने अंतिम आदेश में भुगतान की जाने वाली कुल राशि की अलग से गणना नहीं की।
आयोग ने निर्देश दिया कि बीमा राशि पर 30 अप्रैल 2021 से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जाए।
इसके अलावा LIC को मुआवजे और मुकदमे के खर्च के रूप में कुल 50,000 रुपये भी देने होंगे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि पूरी राशि कारोबारी की पत्नी, नाबालिग बेटे और मां के बीच बराबर बांटी जाएगी।
LIC को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर सभी निर्देशों का पालन करना होगा।

