मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसके तहत AIADMK के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे। इन सभी विधायकों ने बाद में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) पार्टी का दामन थाम लिया था।
चीफ जस्टिस सुष्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने AIADMK के मुख्य सचेतक एग्री एसएस कृष्णमूर्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पीकर के फैसले को सही ठहराया।
कृष्णमूर्ति ने छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अप्रैल में AIADMK के टिकट पर जीते थे चुनाव
मामले से जुड़े सभी छह विधायक अप्रैल 2026 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। हालांकि, चुनाव जीतने के कुछ ही समय बाद उन्होंने अलग-अलग तारीखों पर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
पेरुंदुरई विधानसभा सीट से निर्वाचित एस जयकुमार, मदुरांतकम से विधायक मरगथम कुमारवेल और धारापुरम से विधायक पी सत्यभामा ने 25 मई 2026 को अपने पदों से इस्तीफा दिया था।
इसके अगले दिन, 26 मई को अंबासमुद्रम सीट से निर्वाचित एसक्की सुबाया ने भी विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी।
वहीं, विरालीमलाई से विधायक सी विजयभास्कर ने 16 जून और करूर से विधायक एमआर विजयभास्कर ने 29 जून को इस्तीफा दिया।
इस्तीफा देने के बाद सभी छह नेता मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो गए।
उपचुनाव में दो पूर्व विधायकों की फिर हुई जीत
इन छह नेताओं में शामिल मरगथम कुमारवेल और पी सत्यभामा ने बाद में TVK के टिकट पर विधानसभा उपचुनाव लड़ा।
6 अक्टूबर को हुए उपचुनाव में मरगथम कुमारवेल ने मदुरांतकम विधानसभा सीट से जीत हासिल की, जबकि पी सत्यभामा धारापुरम सीट से दोबारा विधायक चुनी गईं।
इस बीच, AIADMK के मुख्य सचेतक एग्री एसएस कृष्णमूर्ति ने स्पीकर द्वारा छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी।
मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को इस चुनौती को खारिज करते हुए विधानसभा स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के फैसले को बरकरार रखा।
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