सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश सरकार की उस विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों (बीसी) को 34 प्रतिशत आरक्षण देने वाले दो सरकारी आदेशों को निरस्त करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के निर्णय में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में पूरी तरह से उचित और तर्कसंगत आदेश दिया है।
आरक्षण की 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन
यह कानूनी विवाद 1 अक्टूबर को आए हाईकोर्ट के फैसले से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के दोनों आदेशों को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने के सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का यहां उल्लंघन हुआ है।
आरक्षण संबंधी अधिसूचनाओं को रद्द करने के साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को छह सप्ताह के भीतर स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था।
गठबंधन सरकार का चुनावी संकल्प
इससे पहले 18 अगस्त को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी।
उस समय फैसले की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह कदम गठबंधन सरकार के राजनीतिक सिद्धांतों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के चुनावी संकल्प का हिस्सा है। उन्होंने कहा था कि चुनाव के दौरान पिछड़े वर्गों को नामांकित पदों में आरक्षण देने का वादा किया गया था, जिसे सरकार ने पूरा किया है।

