सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान संविधान की प्रस्तावना का पाठ अनिवार्य करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि स्कूलों में छठी कक्षा में ही विद्यार्थियों को प्रस्तावना पढ़ाई जाती है।
कक्षा 6 के पाठ्यक्रम में पहले से शामिल
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान जब याचिका पर विचार किया जा रहा था, तब पीठ ने टिप्पणी की कि संविधान की प्रस्तावना पहले से ही स्कूलों में कक्षा 6 में पढ़ाई जाती है। इसके साथ ही पीठ ने मामले को खारिज करते हुए कहा, “डिसमिस्ड”।
याचिकाकर्ता ने दिया था शिक्षा के अधिकार का हवाला
याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील ने अदालत में तर्क रखा कि सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के समय छात्रों द्वारा संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया जाना चाहिए। अपनी दलीलों के समर्थन में वकील ने शिक्षा के अधिकार से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 21ए का विशेष रूप से उल्लेख किया। अदालत ने इन तर्कों से असहमति जताते हुए याचिका को सीधे तौर पर निरस्त कर दिया।

