इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को सीतापुर में दर्ज एक कथित रेप केस से डिस्चार्ज कर दिया है। अदालत ने पाया कि जांच और अभियोजन से जुड़े दस्तावेज दो विवाहित और परिपक्व वयस्कों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आपसी सहमति के विवाहेतर संबंध को दर्शाते हैं, न कि शादी के झूठे वादे पर किए गए किसी अपराध को।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा कि शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप पहली नजर में ऐसा कोई गंभीर संदेह पैदा नहीं करता जिससे सांसद के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए।
निचली अदालत का आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 5 मई 2025 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत राठौर की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई थी और उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके साथ ही बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बावजूद हाईकोर्ट के पास डिस्चार्ज से जुड़े कानूनी पहलुओं की समीक्षा करने का पुनरीक्षण अधिकार (रिविजनल जूरिडिक्शन) बना रहता है।
आपसी सहमति और बयानों के आधार पर निष्कर्ष
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए तथ्यों की बनावट ऐसी है जिसे सामान्य समझ वाला कोई भी व्यक्ति स्वीकार नहीं कर सकता। मामले से जुड़े तथ्यों के अनुसार, महिला की मुलाकात सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सांसद से हुई थी। इसके बाद राठौर ने उसे राजनीतिक संरक्षण और सहयोग की पेशकश की। महिला ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया और बाद में उसे तैलिक महासभा की जिला महिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिसके बाद दोनों के बीच निकटता बढ़ी।
रिकॉर्ड में दर्ज महिला के पति के बयान का हवाला देते हुए अदालत ने रेखांकित किया कि सांसद महिला को अक्सर अपने आवास पर बुलाते थे और वह कई बार देर रात तक वहीं रुकती थी। अदालत ने महिला के पति, विवाहित बेटे और बहू के उन बयानों पर भी गौर किया जो महिला के आरोपों के समर्थन में दिए गए थे। इन सभी पहलुओं के विश्लेषण के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि यह पूरा घटनाक्रम दो वयस्कों के बीच सहमति से बने रिश्ते का था, जो शादी के वादे पर संबंध बनाने के आरोप से मेल नहीं खाता।
शिकायत की पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग
यह मामला जनवरी 2025 में सीतापुर के कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई एक प्राथमिकी से शुरू हुआ था, जिसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं। महिला ने आरोप लगाया था कि राठौर ने साल 2020 में उसके साथ रेप किया था और बाद में अपनी पत्नी को तलाक देकर उससे शादी करने का भरोसा दिलाते हुए संबंध जारी रखे।
इस पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे अंतर्विरोधी और बेबुनियाद आरोपों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ने देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और इससे केवल न्याय की विफलता होगी। अदालत ने इन्हीं आधारों पर सांसद की डिस्चार्ज याचिका स्वीकार करते हुए मामले को समाप्त कर दिया।

