सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में पटना हाईकोर्ट के हालिया फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया है। शीर्ष अदालत ने निर्णय में दर्ज कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक करार देते हुए बुधवार को पटना हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को नोटिस जारी किया।
तीन जजों की पीठ ने लिया स्वतः संज्ञान
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने इस मामले में अपने सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान) क्षेत्राधिकार का प्रयोग किया। सुनवाई के दौरान पीठ ने रेखांकित किया कि पटना हाईकोर्ट के इस निर्णय में कुछ बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां शामिल हैं।
निचली अदालत की सजा रद्द करने का मामला
यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट के 9 जुलाई के उस आदेश के संदर्भ में हुई है, जिसमें अदालत ने दुष्कर्म के प्रयास के एक आरोपी को बरी कर दिया था। आरोपी पर आरोप था कि उसने अपने फोटोग्राफी स्टूडियो में आई एक महिला ग्राहक के साथ दुष्कर्म की कोशिश की थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पुख्ता तौर पर साबित करने में असमर्थ रहा है, जिसके आधार पर उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी गई।
हाईकोर्ट की टिप्पणियां और कानूनी आधार
पटना हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था कि महिला का सलवार उतारने का प्रयास करना और उसके सीने को दबाना, स्पष्ट रूप से दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित नहीं करता।
अदालत का यह भी कहना था कि यदि अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी को हूबहू स्वीकार भी कर लिया जाए, तब भी यह मामला अधिक से अधिक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 के तहत आता है, जो किसी महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला करने या आपराधिक बल प्रयोग से संबंधित है।

