क्या पांच पदों को भरने की सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ताजा सिफारिशों से बदलेगा भविष्य का सीजेआई (CJI) उत्तराधिकार क्रम?

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा देश की शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए पांच नामों की नवीनतम सिफारिश खाली पदों को भरने के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पद के लिए अनुमानित उत्तराधिकार क्रम में कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है।

कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू; बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर; मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा; जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली; और सुप्रीम कोर्ट बार की वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की पदोन्नति (नियुक्ति) की सिफारिश की है। यदि इन सिफारिशों को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट में पांच खाली पद भर जाएंगे। सिफारिशों से जुड़ी खबरों में यह भी रेखांकित किया गया है कि वी. मोहना बार (वकालत) से सीधे सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने वाले गिने-चुने वकीलों में से एक होंगी।

यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के स्वीकृत पदों की संख्या में वृद्धि किए जाने के कुछ ही समय बाद आया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सहयोगी न्यायाधीशों (puisne judges) की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के निर्णय के बाद, राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाकर 38 करने को मंजूरी दी थी।

हालांकि, ये नियुक्तियां संस्थागत रूप से महत्वपूर्ण होने के बावजूद भविष्य के सीजेआई क्रम में बदलाव नहीं करेंगी। इसका कारण भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए स्थापित वरिष्ठता-आधारित परंपरा है। प्रक्रिया ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर) के तहत, सीजेआई के पद पर सामान्यतः सुप्रीम कोर्ट के उस सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को नियुक्त किया जाता है जिसे इस पद के योग्य माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान रोस्टर के अनुसार, वर्तमान सीजेआई सूर्यकांत (जो 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं) के बाद संभावित सीजेआई क्रम में वे न्यायाधीश शामिल हैं जो पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के सदस्य हैं और जिनकी सेवानिवृत्ति की तारीखें नव-सिफारिशी नामों की संभावित सेवानिवृत्ति तिथियों से काफी आगे तक जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक रोस्टर वर्तमान न्यायाधीशों की नियुक्ति और सेवानिवृत्ति की तारीखों का रिकॉर्ड रखता है।

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वर्तमान वरिष्ठता और सेवानिवृत्ति की गणना के अनुसार, अनुमानित क्रम सीजेआई सूर्यकांत से जस्टिस विक्रम नाथ, उनके बाद जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला, जस्टिस के.वी. विश्वनाथन, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली तक जाने की संभावना है। बशर्ते वरिष्ठता की पारंपरिक व्यवस्था जारी रहे और कोई अप्रत्याशित रिक्ति, इस्तीफा या पदमुक्ति जैसी स्थिति पैदा न हो।

उत्तराधिकार विश्लेषण के दृष्टिकोण से यहीं पर ये नवीनतम सिफारिशें महत्वपूर्ण हो जाती हैं। यदि सिफारिश किए गए सभी पांच नामों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया भी जाता, तो वे वरिष्ठता सूची में वर्तमान में कार्यरत सभी न्यायाधीशों से नीचे रहेंगे। इसलिए, उनमें से किसी के भी सीजेआई बनने के लिए, उन्हें उन सभी न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने या पद छोड़ने के बाद भी पद पर बने रहना होगा जो उनसे वरिष्ठ हैं।

सिफारिश किए गए हाई कोर्ट के चार मुख्य न्यायाधीशों के लिए ऐसा होना व्यावहारिक रूप से असंभव प्रतीत होता है। 18 सितंबर 1964 को जन्मे जस्टिस अरुण पल्ली 17 सितंबर 2029 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त होंगे। 26 दिसंबर 1964 को जन्मे जस्टिस संजीव सचदेवा 25 दिसंबर 2029 को सेवानिवृत्त होंगे। 1 जनवरी 1965 को जन्मे जस्टिस शील नागू 31 दिसंबर 2029 को सेवानिवृत्त होंगे। वहीं, 25 मई 1965 को जन्मे जस्टिस श्री चंद्रशेखर 24 मई 2030 को सेवानिवृत्त होंगे।

इसके विपरीत, सुप्रीम कोर्ट के कई वर्तमान न्यायाधीश जो इनसे वरिष्ठ होंगे, वे इन तारीखों के बाद भी पद पर बने रहेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जस्टिस जे.बी. पारदीवाला 11 अगस्त 2030 को, जस्टिस के.वी. विश्वनाथन 25 मई 2031 को, जस्टिस जॉयमाल्या बागची 2 अक्टूबर 2031 को और जस्टिस विपुल एम. पंचोली 27 मई 2033 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। चूंकि नए अनुशंसित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इन वरिष्ठ कार्यरत न्यायाधीशों से पहले ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे, इसलिए वे वरिष्ठता सूची के शीर्ष तक नहीं पहुंच पाएंगे।

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वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना पर भी यही निष्कर्ष लागू होता है, यदि उनकी जन्म तिथि 27 जून 1966 मान ली जाए। इस आधार पर, यदि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया जाता है, तो वह 26 जून 2031 को सेवानिवृत्त होंगी। हालांकि वह वर्तमान के कुछ न्यायाधीशों की तुलना में अधिक समय तक पद पर रहेंगी, लेकिन वह फिर भी अक्टूबर 2031 में सेवानिवृत्त होने वाले जस्टिस जॉयमाल्या बागची और मई 2033 में सेवानिवृत्त होने वाले जस्टिस विपुल एम. पंचोली से पहले ही सेवानिवृत्त हो जाएंगी। चूंकि सुप्रीम कोर्ट में ये दोनों ही उनसे वरिष्ठ होंगे, इसलिए उनकी पदोन्ती से भी अनुमानित सीजेआई क्रम में कोई बदलाव नहीं होगा।

दूसरे शब्दों में कहें तो, कॉलेजियम की सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट की वास्तविक कार्य-क्षमता को मजबूत कर सकती हैं और तत्काल रिक्तियों को भर सकती हैं, लेकिन वे इन पानी अनुशंसित नामों में से भविष्य का कोई नया सीजेआई उम्मीदवार तैयार करती नहीं दिखती हैं। इन नियुक्तियों से अदालत को न्यायिक और बार (वकालत) का समृद्ध वरिष्ठ अनुभव मिलेगा, लेकिन सीजेआई पद के लिए उत्तराधिकार का मार्ग काफी हद तक अप्रभावित ही रहेगा।

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इसका मुख्य कारण संरचनात्मक है: सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता की गणना सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की तारीख से की जाती है, और सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है। अनुशंसित किए गए सभी पांच नाम, यदि अभी नियुक्त किए जाते हैं, तो वे मौजूदा न्यायाधीशों के बाद शामिल होंगे। उनकी संबंधित सेवानिवृत्ति की तारीखें उन्हें वर्तमान वरिष्ठता क्रम से आगे निकलने की अनुमति नहीं देती हैं।

इसलिए, कॉलेजियम की नवीनतम सिफारिशें, नियुक्ति की दिशा में एक बड़ा कदम होने के बावजूद, भविष्य के सीजेआई उत्तराधिकार क्रम को बदलने में असमर्थ हैं। वर्तमान गणना के अनुसार, अनुशंसित पांच नामों — जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली या वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना — में से किसी के भी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने की संभावना नहीं है।

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