2020 दिल्ली दंगा: खालिद सैफी और तस्लीम अहमद को राहत के संकेत, सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा जमानत पर फैसला

साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के आरोपी अब्दुल खालिद सैफी और तस्लीम अहमद को जल्द ही सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल सकती है। अदालत ने शुक्रवार को दोनों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया, लेकिन साथ ही स्पष्ट संकेत दिए कि उन्हें जल्द ही जमानत मिल सकती है।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में आधिकारिक आदेश शुक्रवार को ही या फिर सोमवार यानी 25 मई को आ सकता है।

“राहत मिलने की पूरी संभावना” — सुप्रीम कोर्ट

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान दो जजों की इस पीठ ने बचाव पक्ष के वकीलों से सीधे बात करते हुए सकारात्मक रुख दिखाया।

पीठ ने टिप्पणी की, “इस बात की पूरी संभावना है कि हम राहत देने पर विचार करेंगे।”

अदालत में अब्दुल खालिद सैफी का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने रखा, जबकि तस्लीम अहमद की पैरवी अधिवक्ता महमूद प्राचा ने की। पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों को सूचित किया कि कोर्ट आज ही की कार्यवाही में या फिर सोमवार को अपना अंतिम फैसला सुना सकता है।

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बड़ी बेंच को मामला भेजने की दिल्ली पुलिस की मांग

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट दोनों आरोपियों को जमानत देने के पक्ष में दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह अभियोजन पक्ष यानी दिल्ली पुलिस की एक अहम मांग पर भी विचार कर रहा है।

दिल्ली पुलिस ने अदालत से अपील की है कि इस मामले से जुड़े एक महत्वपूर्ण ‘कानूनी सवाल’ (Question of Law) को सुप्रीम कोर्ट की एक बड़ी पीठ (Larger Bench) के पास भेजा जाए।

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जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने पुलिस की इस दलील को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा, “हम जमानत याचिकाओं पर विचार करने के साथ-साथ दिल्ली पुलिस की उस दलील की भी समीक्षा करेंगे, जिसमें इस कानूनी सवाल को बड़ी बेंच के पास भेजने का अनुरोध किया गया है।”

फिलहाल कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और सभी की नजरें अब शीर्ष अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हैं।

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