बंदी प्रत्यक्षीकरण | बुजुर्ग पिता अपनी बहू के साथ रहने के लिए स्वतंत्र; आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सुरक्षा और निगरानी के कड़े निर्देश दिए

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बुजुर्ग व्यक्ति के कथित अवैध हिरासत से जुड़े ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ (Habeas Corpus) मामले में अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। हालांकि याचिकाकर्ता (बेटे) ने अपने पिता को अवैध रूप से बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि बुजुर्ग ने अपनी इच्छा से बहू और पोतियों के साथ रहने की बात कही है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि बुजुर्ग फिलहाल अपनी बहू के साथ ही रहेंगे, लेकिन उनके स्वास्थ्य, स्थान और बेटे के साथ नियमित संवाद को लेकर कड़ी शर्तें लागू रहेंगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला (W.P. No. 8490 of 2026) याचिकाकर्ता के पिता ‘चावली वेंकट सुब्बाराव’ को कोर्ट में पेश करने से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी (बहू) ने सत्यनारायणपुरम पुलिस स्टेशन के अधिकारियों की मदद से उनके पिता को अवैध रूप से अपनी हिरासत में रखा है।

कोर्ट ने इस स्थिति को एक वृद्ध पिता के लिए “अत्यंत विचित्र स्थिति” बताया। याचिकाकर्ता और उनकी पत्नी (प्रतिवादी संख्या 5) के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। इस विवाद के बावजूद, वे सभी एक ही घर में रह रहे थे, जहाँ बेटा और पिता भूतल (ground floor) पर और बहू अपनी बेटियों के साथ पहली मंजिल पर रहते थे।

बीएसएनएल (BSNL) कर्मचारी याचिकाकर्ता ने अपने पिता की उम्र और बीमारी को देखते हुए उनके कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे ताकि वह ऑफिस से उन पर नज़र रख सकें। 16 मार्च 2026 को याचिकाकर्ता ने कैमरों के जरिए देखा कि उनके पिता घर पर नहीं हैं, जिसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि चूंकि बुजुर्ग को सीधे बहू की कस्टडी से लाया गया है, इसलिए उनका बयान स्वैच्छिक नहीं है और वह “डर, प्रभाव और दबाव” में बोल रहे हैं। याचिकाकर्ता ने यह आशंका भी जताई कि बहू इस कस्टडी का फायदा उठाकर संपत्ति अपने नाम करवा सकती है।

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इसके विपरीत, बहू (प्रतिवादी संख्या 5) ने कोर्ट को बताया कि वह और उनकी बेटियां बुजुर्ग का पूरा ख्याल रख रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि फिलहाल वे एक होटल के कमरे में रह रहे हैं, लेकिन जल्द ही किसी आरामदायक घर में चले जाएंगे।

हाईकोर्ट का विश्लेषण और बुजुर्ग से बातचीत

कथित तौर पर बंधक बनाए गए बुजुर्ग को व्हीलचेयर पर कोर्ट में पेश किया गया। अधिक उम्र के कारण उन्हें सुनने और बोलने में कठिनाई हो रही थी, फिर भी जस्टिस रवि नाथ तिलहारी और जस्टिस बालाजी मेदामल्ली की बेंच ने पाया कि वह सवालों को समझने में सक्षम थे।

जब उनसे क्षेत्रीय भाषा में पूछा गया कि वह किसके साथ रह रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया: “मैं अपनी बहू और पोतियों के साथ रह रहा हूँ क्योंकि मेरे बेटे ने मुझे पीटा था।”

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि वह पिछले पांच-छह महीनों से अपनी मर्जी से उनके साथ रह रहे हैं और आगे भी अपनी बहू और पोतियों के साथ ही रहना चाहते हैं।

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अदालत का निर्णय

अंतिम निर्णय आने तक याचिका को लंबित रखते हुए, हाईकोर्ट ने बुजुर्ग की इच्छा और बेटे की चिंताओं के बीच संतुलन बनाने के लिए निम्नलिखित अंतरिम निर्देश दिए:

  1. कस्टडी: बुजुर्ग चावली वेंकट सुब्बाराव अगले आदेश तक अपनी बहू के साथ ही रहेंगे।
  2. देखभाल: बहू और पोतियों को बुजुर्ग के स्वास्थ्य और उनकी सभी जरूरतों का उचित ध्यान रखना होगा।
  3. स्थान प्रतिबंध: बुजुर्ग को विजयवाड़ा शहर की सीमा से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। शहर के भीतर भी आवास बदलने पर इसकी सूचना पुलिस, याचिकाकर्ता और कोर्ट को देनी होगी।
  4. पुलिस निगरानी: सत्यनारायणपुरम पुलिस स्टेशन के एक पुरुष और एक महिला कांस्टेबल (सादे कपड़ों में) हर 15 दिन में बुजुर्ग से मुलाकात करेंगे और उनकी देखभाल पर रिपोर्ट रजिस्ट्रार (न्यायिक) को सौंपेंगे।
  5. संवाद: हालांकि बेटे की शारीरिक मुलाकात की मांग पर बाद में विचार होगा, लेकिन कोर्ट ने आदेश दिया कि बहू को प्रतिदिन फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से बेटे और पिता के बीच बातचीत करवानी होगी।
  6. शपथ पत्र: बहू को इन सभी शर्तों के पालन के संबंध में 10 दिनों के भीतर एक हलफनामा दाखिल करना होगा।
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हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि 15 जून 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर इस पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता (Mediation) का विकल्प भी देखा जा सकता है।

केस विवरण ब्लॉक

  • केस शीर्षक: चावली [बेटे के रूप में नामित] बनाम आंध्र प्रदेश राज्य व अन्य
  • केस संख्या: डब्ल्यूपी संख्या 8490 वर्ष 2026
  • बेंच: जस्टिस रवि नाथ तिलहारी और जस्टिस बालाजी मेदामल्ली
  • दिनांक: 17.04.2026

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