पत्रकार राणा अय्यूब के ट्वीट ‘भड़काऊ’ और ‘सांप्रदायिक’, दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 घंटे में कार्रवाई के दिए निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को पत्रकार राणा अय्यूब द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कुछ पोस्ट को “अत्यधिक अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक” बताते हुए कड़ी टिप्पणी की है। इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ को निर्देश दिया कि वे “मिलकर काम करें” और 24 घंटे के भीतर इन विवादित पोस्ट्स पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

अदालत का यह हस्तक्षेप अमिता सचदेवा नामक महिला की याचिका पर आया है। याचिकाकर्ता, जो स्वयं को सनातन धर्म की अनुयायी बताती हैं, ने आरोप लगाया कि राणा अय्यूब के ट्वीट्स ने हिंदू देवी-देवताओं और प्रतिष्ठित ऐतिहासिक हस्तियों का अपमान किया है। याचिका के अनुसार, इन पोस्ट्स से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) व अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कौरव ने संज्ञान लिया कि एक मजिस्ट्रेट अदालत पहले ही अय्यूब के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दे चुकी है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने पत्रकार से उनका रुख स्पष्ट करने को कहा है और केंद्र व ‘X’ को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “इस मामले को परसों (अगले कार्यदिवस) के लिए सूचीबद्ध किया जाए। प्रतिवादी संख्या 4 (अय्यूब) द्वारा किए गए अत्यधिक अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक ट्वीट्स के मद्देनजर कार्रवाई आवश्यक है, जिनके संबंध में एक सक्षम न्यायालय द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश भी दिया गया है।”

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है ताकि समन्वय और कार्रवाई के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन हो सके।

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यह पूरा विवाद साल 2016-17 के दौरान किए गए सोशल मीडिया पोस्ट्स से जुड़ा है। जनवरी 2025 में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने माना था कि मामले के तथ्य प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत संज्ञेय अपराध दर्शाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • धारा 153A: धर्म, जाति या जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना।
  • धारा 295A: धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के इरादे से किया गया जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य।
  • धारा 505: सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान देना।
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याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा तब खटखटाया जब ‘X’ के स्थानीय शिकायत अधिकारी और शिकायत अपीलीय समिति (GAC) से सामग्री हटाने की उनकी कोशिशें विफल रहीं। समिति ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि मामला अभी विचाराधीन (sub-judice) है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इन ट्वीट्स की सार्वजनिक उपलब्धता उनके मौलिक अधिकारों का निरंतर उल्लंघन कर रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को “जरूरी कदम उठाने” के लिए 24 घंटे की समयसीमा देकर धार्मिक वैमनस्य फैलाने वाली सामग्री पर लगाम लगाने की तात्कालिकता को रेखांकित किया है।

इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी, जिसमें अदालत दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और ‘X’ द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा करेगी।

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