सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली पुलिस को तस्लीम अहमद और अब्दुल खालिद सैफी की जमानत याचिकाओं पर अपना जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दी है। ये दोनों आरोपी फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े “बड़ी साजिश” (larger conspiracy) के मामले में नामजद हैं।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने दिल्ली पुलिस के वकील के अनुरोध पर यह समय दिया। इससे पहले, 11 फरवरी को शीर्ष अदालत ने अहमद और सैफी की उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख तब किया जब पिछले साल 2 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने तस्लीम अहमद की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि केवल “मुकदमे में देरी” को जमानत देने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता।
हाईकोर्ट का कहना था कि जब तक मौलिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन या संवैधानिक अधिकारों का हनन न हो, तब तक सिर्फ लंबी कैद या ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि इस मामले में जो आरोपी पहले ही जमानत पा चुके हैं, वे आरोपों (charges) पर बहस करने में देरी कर रहे हैं, जिसका खामियाजा जेल में बंद आरोपियों को भुगतना पड़ रहा है।
तस्लीम अहमद और खालिद सैफी उन कई प्रमुख व्यक्तियों में शामिल हैं, जिन पर सख्त यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम भी आरोपी हैं।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ये सभी फरवरी 2020 के दंगों के “मास्टरमाइंड” थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। इस भीषण हिंसा में 53 लोगों की जान चली गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय बढ़ाए जाने के बाद, अब दिल्ली पुलिस का औपचारिक जवाब आने पर इस मामले की विस्तृत सुनवाई होगी।

