एटीएम से नहीं निकले पैसे पर खाते से कटे 5,000 रुपये; उपभोक्ता आयोग ने एक्सिस बैंक पर लगाया 10,000 का जुर्माना

नागपुर स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक्सिस बैंक को ‘सेवा में कमी’ (deficiency in service) का दोषी पाया है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह एक ग्राहक को उसके फंसे हुए पैसे लौटाए और साथ ही 10,000 रुपये का मुआवजा भी दे। यह मामला आठ साल पुराने एक असफल एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़ा है, जिसमें मशीन से नकदी नहीं निकली थी, लेकिन ग्राहक के खाते से पैसे काट लिए गए थे।

आयोग के अध्यक्ष सतीश सप्रे और सदस्य मिलिंद केदार की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि खाते से पैसे कटने के बाद भी नकदी न मिलना एक “गंभीर विषय” है। पीठ ने जोर देकर कहा कि यह बैंक की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे लेन-देन की जांच करे और ग्राहकों को तुरंत राहत प्रदान करे।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला 19 अगस्त, 2018 का है। नागपुर के रहने वाले शिकायतकर्ता ने एक्सिस बैंक के एक एटीएम से 5,000 रुपये निकालने का प्रयास किया था। एटीएम मशीन से नकदी तो नहीं निकली, लेकिन उनके सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते से राशि डेबिट हो गई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने तुरंत एक्सिस बैंक में शिकायत दर्ज कराई और इसके बाद कस्टमर केयर से लेकर बैंक के प्रधान कार्यालय तक कई बार संपर्क किया। हालांकि, बैंक ने उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। आखिरकार, अक्टूबर 2024 में बैंक ने इस मामले को यह कहते हुए बंद कर दिया कि ट्रांजैक्शन सफल रहा था और ग्राहक के दावों को “झूठा” करार दे दिया। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से परेशान होकर ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

आयोग की टिप्पणियां और निष्कर्ष

कानूनी नोटिस दिए जाने के बावजूद एक्सिस बैंक आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ और न ही कोई सबूत पेश किया। इस कारण मामले की सुनवाई एकपक्षीय (ex parte) की गई।

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पिछले महीने सुनाए गए अपने फैसले में आयोग ने कहा कि बैंक ने ग्राहक की शिकायत को “गंभीरता से” नहीं लिया। पीठ ने विशेष रूप से नोट किया कि बैंक ने उचित आंतरिक जांच या सीसीटीवी सत्यापन (CCTV verification) का कोई सबूत पेश नहीं किया।

आयोग ने कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों से यह स्पष्ट है कि बैंक ने शिकायतकर्ता की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।” आयोग ने यह भी पाया कि लोकपाल (Ombudsman) प्रक्रिया के दौरान भी ग्राहक को निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं दिया गया, जो बैंक की ओर से सेवा में बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।

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आयोग का निर्णय

आयोग ने एक्सिस बैंक को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  1. शिकायतकर्ता को उनके 5,000 रुपये वापस किए जाएं।
  2. पिछले आठ वर्षों से ग्राहक को हुई मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए 10,000 रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाएं।

यह फैसला स्पष्ट करता है कि बैंकों को एटीएम नेटवर्क में तकनीकी विफलताओं की सक्रिय रूप से जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी ग्राहक को सिस्टम की गलतियों का खामियाजा न भुगतना पड़े।

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