“पहली पीढ़ी के वकीलों के पास कोई सहारा नहीं”: राजस्थान हाईकोर्ट ने जूनियर वकीलों के लिए ‘वेलफेयर फंड’ बनाने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक मोटर दुर्घटना दावे (MACT) की अपील में देरी को माफ करते हुए युवा वकीलों के हित में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील कदम उठाया है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की पीठ ने “जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड” (Junior Advocates Welfare Fund) की स्थापना का निर्देश दिया है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पहली पीढ़ी के वकीलों को कानून की किताबें खरीदने में मदद करना है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला श्रीमती मीना देवी और अन्य (अपीलकर्ता) बनाम राहुल हल्दिया और अन्य (प्रतिवादी) से संबंधित है। अपीलकर्ताओं ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), दौसा द्वारा 10 जनवरी 2017 को पारित निर्णय और अवार्ड को चुनौती दी थी। हालांकि, यह अपील 450 दिनों की भारी देरी से दायर की गई थी। अपीलकर्ताओं ने लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत एक प्रार्थना पत्र दायर कर इस देरी को माफ करने का अनुरोध किया था।

पक्षकारों की दलीलें

अपीलकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि अपीलकर्ता अपने वकील से संपर्क नहीं कर सके थे, जिसके कारण उन्हें ट्रिब्यूनल द्वारा पारित निर्णय की जानकारी नहीं मिल पाई। यह भी कहा गया कि ट्रिब्यूनल द्वारा दिया गया मुआवजा अपर्याप्त है, और वे मुआवजे की राशि में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि न्याय के हित में देरी को माफ कर मामले की सुनवाई गुण-दोष (merits) के आधार पर की जाए।

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कोर्ट की टिप्पणी और विश्लेषण

जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने कहा कि कोर्ट 450 दिनों की देरी के लिए दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है। हालांकि, चूंकि अपील में कानून और तथ्यों के महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल थे, इसलिए कोर्ट ने 11,000 रुपये के हर्जाने (cost) की शर्त पर देरी को माफ करने का निर्णय लिया।

इस अवसर का उपयोग करते हुए, हाईकोर्ट ने कानूनी पेशे में संघर्ष कर रहे युवा वकीलों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। जस्टिस ढंड ने अपनी टिप्पणी में कहा:

“पहली पीढ़ी के युवा वकीलों के पास अपनी वकालत जमा करने के लिए कोई सहारा नहीं होता है और उनके पास कानून की आवश्यक किताबें खरीदने के लिए भी संसाधन नहीं होते, जिनकी उन्हें हर दिन आवश्यकता होती है।”

निर्णय में जूनियर वकीलों की आर्थिक अस्थिरता को रेखांकित करते हुए कहा गया कि “युवा वकीलों के लिए धन की समस्या बहुत आम है” और “आवश्यक कानून की किताबों के बिना, वे अपने केस को कुशलता से तैयार करने के लिए संघर्ष करते हैं।”

कोर्ट ने संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा:

“विकास का समर्थन करें, युवा प्रतिभा का सम्मान करें और एक ऐसी कानूनी प्रणाली बनाने में मदद करें जहां हर युवा वकील आत्मविश्वास और मददगार महसूस करे।”

निर्णय और निर्देश

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हाईकोर्ट ने अपील में देरी को माफ करते हुए अपीलकर्ताओं को 11,000 रुपये जमा करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, कोर्ट ने कानूनी बिरादरी के कल्याण के लिए निम्नलिखित विशिष्ट निर्देश जारी किए:

  1. फंड का निर्माण: राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के अध्यक्ष/सचिव को “जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड फॉर परचेजिंग लॉ बुक्स” (Junior Advocates Welfare Fund for purchasing Law Books) के नाम से एक अलग बैंक खाता खोलने का निर्देश दिया गया। अपीलकर्ताओं द्वारा जमा की जाने वाली कॉस्ट की राशि इसी फंड में जमा होगी।
  2. जूनियर्स को सहायता राशि: कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस खाते से उन जूनियर वकीलों को 5,000 रुपये की राशि वितरित की जाए जो 28 वर्ष से कम आयु के हैं और जिन्होंने कम से कम एक वर्ष की वकालत पूरी कर ली है, लेकिन पांच वर्ष से अधिक का अनुभव नहीं है।
  3. चयन प्रक्रिया: बार एसोसिएशन को ऐसे पात्र वकीलों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है जो कानून की किताबें खरीदने में असमर्थ हैं। यह वितरण “पहले आओ पहले पाओ” (first come first serve) के आधार पर किया जाएगा।
  4. राज्य स्तरीय योजना: कोर्ट ने राज्य सरकार, बार काउंसिल ऑफ राजस्थान और सभी बार एसोसिएशनों (हाईकोर्ट से लेकर तालुका स्तर तक) को “द राजस्थान एडवोकेट्स (एड टू परचेज लॉ बुक्स) स्कीम” (The Rajasthan Advocates (Aid to purchase Law Books) Scheme) नाम से एक योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
    • इस प्रस्तावित योजना के तहत, पात्र जूनियर वकीलों को 5,000 रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान करने के लिए खरीद समितियां (Purchase Committees) गठित की जाएंगी।
    • लाभार्थियों को राशि प्राप्त करने के एक महीने के भीतर खरीदी गई पुस्तकों की रसीद जमा करनी होगी।
    • कोर्ट ने सुझाव दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं से इस फंड में स्वेच्छा से योगदान देने का अनुरोध किया जाए।
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कोर्ट ने निर्देश दिया कि बैंक खाता खोलने और राशि वितरण के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाए। इस आदेश के अनुपालन की जांच के लिए मामले को 6 मार्च, 2026 को सूचीबद्ध किया गया है। आदेश की प्रति मुख्य सचिव, विधि सचिव, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ राजस्थान को भेजने का निर्देश दिया गया है।

  • केस टाइटल: श्रीमती मीना देवी व अन्य बनाम राहुल हल्दिया व अन्य
  • केस नंबर: एस.बी. सिविल मिसलेनियस अपील नंबर 3327/2018

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