पुणे पोर्शे हादसा | रक्त नमूना अदला-बदली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समानता के आधार पर आरोपी को जमानत दी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2024 के पुणे पोर्शे हादसा मामले में एक आरोपी को जमानत दे दी। न्यायालय ने कहा कि अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर उसे भी राहत दी जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने अश्पाक बाशा मकानदार को जमानत देते हुए ध्यान दिया कि वह लगभग 20 महीने से जेल में है, जबकि इसी मामले के तीन अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं।

यह मामला 19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर क्षेत्र में हुए उस हादसे से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर नशे में एक 17 वर्षीय किशोर द्वारा चलाई जा रही पोर्शे कार ने दो आईटी पेशेवरों को कुचल दिया था।

मकानदार पर आरोप है कि उसने अस्पताल में नाबालिगों के रक्त नमूनों को उनके अभिभावकों के नमूनों से बदलवाने की साजिश में सहायता की, ताकि चिकित्सीय साक्ष्यों से छेड़छाड़ की जा सके।

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता की दलील दर्ज करते हुए कहा कि अपीलकर्ता “उन सह-आरोपियों के समान स्थिति में है जिन्हें पहले ही जमानत दी जा चुकी है” और आदेश दिया, “पूर्व आदेश के अनुसार जमानत प्रदान की जाती है।”

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सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी को इस मामले में तीन अन्य आरोपियों — कथित बिचौलिया अमर संतोष गायकवाड़ तथा दो नाबालिगों के अभिभावक आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल — को जमानत दी थी। उस समय न्यायालय ने कहा था कि वे लगभग 18 महीने से हिरासत में हैं और नाबालिगों से जुड़े ऐसे मामलों में अभिभावकों की जिम्मेदारी तय होती है।

इससे पहले न्यायालय ने 7 जनवरी और 23 जनवरी को महाराष्ट्र सरकार से इन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर जवाब मांगा था।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 दिसंबर को इस मामले में आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिनमें गायकवाड़, सूद और मित्तल शामिल थे।

इस मामले में किशोर न्याय बोर्ड ने पहले मुख्य नाबालिग आरोपी को सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने जैसी शर्तों के साथ जमानत दे दी थी, जिससे देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। पुलिस की पुनर्विचार याचिका के बाद बोर्ड ने आदेश संशोधित कर उसे पर्यवेक्षण गृह भेज दिया। बाद में जून में हाई कोर्ट ने नाबालिग की रिहाई का निर्देश दिया।

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रक्त नमूना अदला-बदली मामले में नाबालिग के माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावरे और श्रीहरि हलनोर, अस्पताल कर्मचारी अतुल घाटकांबले, सूद, मित्तल सहित कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इन पर चिकित्सीय साक्ष्यों से छेड़छाड़ की साजिश में शामिल होने का आरोप है।

ताजा आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत की अवधि और सह-आरोपियों को मिली जमानत को ध्यान में रखते हुए समानता के आधार पर एक और आरोपी को जमानत प्रदान कर दी है।

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