केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि ‘नव केरल सिटिजन रिस्पॉन्स प्रोग्राम’ पर सरकारी धन खर्च नहीं किया जा सकता था और इस योजना के लिए ₹20 करोड़ की स्वीकृति देने वाले आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि इस कार्यक्रम के लिए किया गया व्यय सरकार के व्यवसाय नियमों (Rules of Business) का उल्लंघन था।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु की गई वित्तीय स्वीकृति निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी।
अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें से एक केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) के प्रदेश अध्यक्ष अलोशियस जेवियर द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कार्यक्रम शुरू करने के आदेश को रद्द करने और सरकार को सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से रोकने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह पहल वास्तव में एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल या गठबंधन का राजनीतिक अभियान है, जिसे सरकारी कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत किया गया। उनका आरोप था कि इसे 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से शुरू किया गया।
खंडपीठ ने माना कि कार्यक्रम के लिए किया गया व्यय व्यवसाय नियमों के अनुरूप नहीं था और इसी आधार पर ₹20 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति को निरस्त कर दिया।
अदालत के इस आदेश के बाद राज्य सरकार वर्तमान स्वरूप में इस कार्यक्रम के लिए सरकारी धन का उपयोग नहीं कर सकेगी।

