दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिस पर एक बच्चे की तस्करी कर उसे अवैध शराब बिक्री में लगाने का आरोप है। अदालत ने कहा कि अब पेशेवर अपराधी सजा से बचने के लिए बच्चों का “हथियार” की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं और बच्चों का इस तरह अपराधों में दोहन लगातार बढ़ रहा है।
न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने 4 फरवरी को पारित आदेश में कहा:
“ऐसे मामले में अग्रिम जमानत देना, जिसमें किसी बच्चे का अपराध में शोषण हुआ हो, समाज को बहुत गलत संदेश देगा।”
उन्होंने आगे कहा:
“अपराधों में बच्चों का शोषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। अब पेशेवर अपराधी दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए बच्चों का एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं।”
न्यायालय ने माना कि महिला की हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि कहीं और भी बच्चों की तस्करी कर इस प्रकार के कार्य में तो नहीं लगाया गया। अदालत ने कहा:
“मैं इसे अग्रिम जमानत देने योग्य मामला नहीं मानता।”
पुलिस के अनुसार, महिला ने अपने गांव से एक नाबालिग बच्चे को दिल्ली लाकर उसे अवैध शराब की बिक्री में लगा दिया। मामला तब उजागर हुआ जब महिला के एक रिश्तेदार को उस बच्चे के साथ अवैध शराब बेचते देखा गया। इसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई।
आरोपी महिला ने अदालत में तर्क दिया कि उसके खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि वह बच्चे को अवैध कार्य के लिए दिल्ली लाई या खुद शराब बिक्री से जुड़ी थी।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि जांच में महिला की संलिप्तता सामने आई है और वह इस अवैध धंधे से पैसे भी प्राप्त कर रही थी।
अदालत ने इन तथ्यों और आरोप की गंभीरता को देखते हुए उसे गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया।

