इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में पांच सेवानिवृत्त जजों को ‘एडहॉक’ (तदर्थ) न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। राष्ट्रपति को लिखे एक पत्र में बार एसोसिएशन ने इस कदम को “अस्पष्ट” बताते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में संवैधानिक मानदंडों की अनदेखी की गई है और इसमें हितधारकों से कोई परामर्श नहीं लिया गया।
यह विवाद संविधान के अनुच्छेद 224-A के उपयोग को लेकर है, जो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को हाईकोर्ट में कार्य करने के लिए नियुक्त करने की अनुमति देता है। बार एसोसिएशन का तर्क है कि उत्तर प्रदेश में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के नाम पर लाया गया यह प्रस्ताव संवैधानिक योजना के विपरीत है।
संवैधानिक वैधता पर सवाल
5 फरवरी को लिखे गए और गुरुवार को सार्वजनिक किए गए इस पत्र में HCBA ने तर्क दिया कि अनुच्छेद 224-A के तहत ऐसी नियुक्तियों की प्रक्रिया संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा शुरू की जानी चाहिए, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति अनिवार्य है।
बार एसोसिएशन का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का सीधा हस्तक्षेप स्थापित प्रक्रियाओं से मेल नहीं खाता। इसके अलावा, चयन की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए बार ने कहा कि इन पांच जजों का चयन उपलब्ध सेवानिवृत्त जजों के पूरे समूह का उचित मूल्यांकन किए बिना किया गया है।
कार्यकुशलता और लंबित मुकदमों की चिंता
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का उद्देश्य इन नियुक्तियों के माध्यम से मुकदमों के निस्तारण में तेजी लाना है, लेकिन बार एसोसिएशन का मानना है कि इससे उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी। एसोसिएशन के अनुसार, यदि नियमित नियुक्तियों में देरी और बढ़ते मुकदमों के कारण एडहॉक नियुक्तियां जरूरी थीं, तो उन सेवानिवृत्त जजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी जिनका मुकदमों के त्वरित निस्तारण का शानदार रिकॉर्ड रहा हो।
एसोसिएशन ने निम्नलिखित आरोप भी लगाए हैं:
- यह प्रक्रिया रिक्त पदों पर होने वाली नियमित नियुक्तियों के विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जा रही है।
- चयन प्रक्रिया में बार (वकीलों की संस्था) जैसे महत्वपूर्ण हितधारकों को शामिल नहीं किया गया।
- यह कदम लंबित मामलों के निपटारे के मूल उद्देश्य को ही विफल कर सकता है।
प्रस्तावित नियुक्तियां
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस महीने की शुरुआत में पांच सेवानिवृत्त जजों को दो साल के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडहॉक जज नियुक्त करने को मंजूरी दी थी:
- जस्टिस मो. फैज आलम खान
- जस्टिस मो. असलम
- जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी
- जस्टिस रेनू अग्रवाल
- जस्टिस ज्योत्स्ना शर्मा
राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए HCBA ने जोर दिया कि संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों के लिए सर्वोत्तम उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि न्यायपालिका की गरिमा बनी रहे।

