सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा: एलआईआरसीटीसी घोटाले में सिर्फ अभियोजन स्वीकृति न होने से लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी ट्रायल से नहीं बच सकते

सीबीआई ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि आईआरसीटीसी घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव मुकदमे से केवल इस आधार पर नहीं बच सकते कि उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के समय मौजूद नहीं थी।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डी. पी. सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत स्वीकृति लेना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि मार्च 2020 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने भी यही राय दी थी।

“स्वीकृति आवश्यक नहीं थी, फिर भी बाद में ले ली गई। यह स्वीकृति सीआरपीसी की धारा 207 के तहत कार्यवाही के दौरान ली गई और इससे किसी भी आरोपी को कोई पूर्वग्रह नहीं हुआ। कार्यवाही वैध बनी रहती है जब तक कोई ठोस पूर्वग्रह दिखाया न जाए — और ऐसा कुछ भी नहीं दर्शाया गया है,” सिंह ने कहा।

यह दलील लालू परिवार द्वारा ट्रायल कोर्ट के 13 अक्टूबर 2025 के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका के संदर्भ में दी गई जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

सीबीआई ने कहा कि मामला लंबा खिंचने से बचाने के लिए बाद में अभियोजन स्वीकृति ली गई, जो कानून के तहत मान्य है। केवल स्वीकृति की देरी से संज्ञान या मुकदमे की वैधता पर असर नहीं पड़ता।

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आईआरसीटीसी घोटाला उस समय का है जब लालू यादव रेल मंत्री थे और कथित रूप से रेलवे के दो होटलों के रखरखाव अनुबंध में अनियमितताएं हुईं।

ट्रायल कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य 11 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(d)(ii) और (iii) के साथ धारा 13(2) के तहत आरोप तय किए थे। इन धाराओं के तहत अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है, जबकि आईपीसी की धारा 420 के तहत 7 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

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अन्य आरोपियों में शामिल हैं:

  • एम/एस लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी
  • विजय कोच्छर, विनय कोच्छर
  • सरला गुप्ता
  • प्रेमचंद गुप्ता
  • प्रदीप कुमार गोयल
  • राकेश सक्सेना
  • भूपेंद्र कुमार अग्रवाल
  • राकेश कुमार गोगिया
  • विनोद कुमार अस्ताना

लालू परिवार की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन की स्वीकृति (धारा 19, भ्रष्टाचार अधिनियम और धारा 197, सीआरपीसी) के बिना ही संज्ञान ले लिया था। इस पर सीबीआई ने कहा कि धारा 197 का सवाल ट्रायल के दौरान विचारणीय है और प्रारंभिक चरण में संज्ञान पर कोई प्रभाव नहीं डालता।

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अदालत इस मामले की आगे सुनवाई करेगी।

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