सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े ‘बड़े षड्यंत्र’ मामले में आरोपी तस्लीम अहमद की ज़मानत याचिका पर बुधवार को दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अहमद ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें यह कहते हुए ज़मानत याचिका खारिज कर दी गई थी कि केवल ट्रायल में देरी को ज़मानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तस्लीम अहमद की ज़मानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है। अहमद फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े ‘बड़े षड्यंत्र’ मामले में आरोपी हैं।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सिर्फ मुकदमे में देरी को ज़मानत देने का एकमात्र आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की थी:
“जब तक किसी आरोपी के मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन या संवैधानिक अधिकारों का हनन न हो, तब तक केवल लंबी हिरासत या ट्रायल में देरी के आधार पर ज़मानत नहीं दी जा सकती।”
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन सह-आरोपियों को पहले से ज़मानत मिल चुकी है, वे चार्ज पर बहस को टालकर जेल में बंद आरोपियों की स्थिति और कठिन बना रहे हैं।
तस्लीम अहमद के अलावा कार्यकर्ता उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य को यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपित किया गया है। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़के दंगों की “साजिश” रची थी।
ये दंगे फरवरी 2020 में भड़के थे, जिनमें 53 लोगों की जान गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद दिल्ली पुलिस को जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद आगे की सुनवाई होगी।

