उड़ीसा हाईकोर्ट ने बार और बेंच के बीच पेशेवर उत्कृष्टता को मान्यता देते हुए 10 वकीलों को ‘सीनियर एडवोकेट’ (Senior Advocate) के रूप में नामित किया है। 10 फरवरी, 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश द्वारा लिया गया है।
हाईकोर्ट ने यह कदम एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 16 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उठाया है। इसके साथ ही, इस प्रक्रिया में उड़ीसा हाईकोर्ट (डेसिग्नेशन ऑफ सीनियर एडवोकेट) रूल्स, 2025 के नियम 7(1) का पालन किया गया है। यह नामांकन विज्ञापन संख्या 01/2025 के संदर्भ में किया गया है।
सीनियर एडवोकेट का दर्जा एक विशेष विशेषाधिकार है, जो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी वकील को उनकी योग्यता, बार में उनकी प्रतिष्ठा, या कानून में विशेष ज्ञान और अनुभव के आधार पर प्रदान किया जाता है।
नामित सीनियर एडवोकेट्स की सूची
हाईकोर्ट द्वारा निम्नलिखित वकीलों को सीनियर एडवोकेट का सम्मान प्रदान किया गया है:
- श्री बिजय कुमार दास (Shri Bijoy Kumar Dash)
- श्री हरमोहन ढाल (Shri Harmohan Dhal)
- सुश्री सुजाता जेना (Ms. Sujata Jena)
- श्री निरोध कुमार साहू (Shri Nirod Kumar Sahu)
- श्री संजीब कुमार स्वाइन (Shri Sanjib Kumar Swain)
- श्री उपेंद्र कुमार सामल (Shri Upendra Kumar Samal)
- श्री लालतेंदु सामंतरे (Shri Lalatendu Samantaray)
- श्री गोपीनाथ मिश्रा (Shri Gopinath Mishra)
- श्री बिरजा प्रसाद त्रिपाठी (Shri Biraja Prasad Tripathy)
- श्री प्रसन्न कुमार परिही (Shri Prasanna Kumar Parhi)
रजिस्ट्रार जनरल द्वारा हस्ताक्षरित इस अधिसूचना की प्रतियां सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के महासचिव, देश भर के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल्स, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और ओडिशा स्टेट बार काउंसिल को भेज दी गई हैं। इसके अलावा, औद्योगिक न्यायाधिकरण (Industrial Tribunal) और राज्य सहकारी न्यायाधिकरण (State Cooperative Tribunal) सहित विभिन्न न्यायाधिकरणों को भी सूचित किया गया है।
यह पदनाम ओडिशा के कानूनी समुदाय में इन वकीलों की वरिष्ठता और विशेषज्ञता को रेखांकित करता है।

