सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को दिल्ली के तिस हजारी कोर्ट परिसर में वकील पर हमले की शिकायत पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालतों में ऐसा “गुंडा राज” बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और यह क़ानून के शासन की विफलता का संकेत है।
यह टिप्पणी उस समय आई जब एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष यह मामला तत्काल सुनवाई के लिए रखा और आरोप लगाया कि उन्हें एक अन्य वकील व उसके साथियों ने अदालत कक्ष के अंदर ही पीटा।
वकील ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजनिया की पीठ के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा:
“मैं तिस हजारी कोर्ट में एडीजे हरजीत सिंह पाल की अदालत में पेश हो रहा था। मैं आरोपी की ओर से उपस्थित था। शिकायतकर्ता के वकील ने कई गुंडों के साथ मुझ पर हमला कर दिया… उन्होंने मुझे मारा और जज वहीं बैठे थे। कोर्ट के सभी सदस्य मौजूद थे। यह 7 फरवरी को हुआ।”
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा कि क्या इस घटना की जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दी गई है। उन्होंने निर्देश दिया:
“दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखिए और उसकी एक प्रति मुझे भी भेजिए। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस पर संज्ञान लें। कार्रवाई प्रशासनिक पक्ष से होगी। ऐसा ‘गुंडा राज’ हमें स्वीकार नहीं है। यह तो क़ानून के राज की विफलता है। यह काम करिए और मुझे बताइए।”
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने वकील को उचित राहत के लिए संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा।
तिस हजारी अदालत में कथित रूप से न्यायाधीश की उपस्थिति में वकील पर हमला होना एक गंभीर मामला माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि यह मुद्दा अब दिल्ली हाईकोर्ट के प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से उठ सकता है।
मुख्य न्यायाधीश की यह टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि अदालतों को भयमुक्त और सुरक्षित स्थान बनाना न्यायपालिका की प्राथमिकता है, जहां वकील और पक्षकार बिना किसी डर के न्याय पा सकें।

