सोशल मीडिया पर एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 1 जनवरी 2026 से तस्वीरों के आधार पर काटे जाने वाले ट्रैफिक चालानों को अवैध घोषित कर दिया है। वायरल संदेश के अनुसार, अब चालान पर ड्राइवर के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है, अन्यथा कोर्ट में इसे मान्य नहीं माना जाएगा।
Law Trend की जांच में यह दावा पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक पाया गया है।
भ्रामक दावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जा रहे संदेश में निम्नलिखित आरोप लगाए जा रहे हैं:
“सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश! 1 जनवरी 2026 से गाड़ियों के आगे या पीछे की फोटो खींचकर बनाए गए चालान कोर्ट में मान्य नहीं होंगे। ड्राइवर के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है!!”
पड़ताल और तथ्य
हमारी विस्तृत जांच में इस दावे का समर्थन करने वाला सुप्रीम कोर्ट का ऐसा कोई आदेश नहीं मिला। वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। निम्नलिखित तथ्य कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हैं:
1. आईटी एक्ट और मोटर वाहन अधिनियम के तहत वैधता: डिजिटल साक्ष्य, जिसमें तस्वीरें और वीडियो शामिल हैं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत पूरी तरह से वैध और स्वीकार्य हैं। विशेष रूप से, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A सड़क सुरक्षा के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन’ (Electronic Monitoring and Enforcement) को अनिवार्य बनाती है, जो कैमरा-आधारित चालानों के लिए वैधानिक आधार प्रदान करती है।
2. सुप्रीम कोर्ट का रुख: वायरल दावे के विपरीत, सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न फैसलों में लगातार निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से राज्यों को सीसीटीवी कैमरों और स्पीड गन के माध्यम से निगरानी बढ़ाने का आदेश दिया है ताकि ट्रैफिक प्रवर्तन में मानवीय हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार को कम किया जा सके।
3. हस्ताक्षर की कोई आवश्यकता नहीं: ई-चालान (e-Challan) प्रणाली का मूल उद्देश्य वाहन को शारीरिक रूप से रोके बिना उल्लंघन का पता लगाना है, जिससे यातायात का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित हो सके। ई-चालान पर ड्राइवर के हस्ताक्षर की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। डेटाबेस रिकॉर्ड के आधार पर वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर और पते पर सीधे नोटिस भेजा जाता है, जो कानूनी रूप से मान्य है।
4. 2026 में सख्त नियम: सरकार ने 2026 में यातायात नियमों को और सख्त कर दिया है। नए ‘इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट’ स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत, सटीकता सुनिश्चित करने के लिए फोटोग्राफिक साक्ष्य के साथ अक्सर वीडियो फुटेज भी संलग्न किए जाते हैं। इसके अलावा, यदि 45 दिनों के भीतर चालान का भुगतान नहीं किया जाता है, तो वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने और आरसी/डीएल (RC/DL) सेवाओं को ब्लॉक करने के प्रावधान लागू हैं।
निष्कर्ष
यह वायरल खबर पूरी तरह से निराधार है। सुप्रीम कोर्ट ने फोटो आधारित चालानों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। 1 जनवरी 2026 से, ई-चालान प्रणाली और अधिक प्रभावी और डिजिटल रूप से मजबूत हो गई है।
पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक पुष्टि के बिना ऐसी असत्यापित खबरों को साझा न करें। यातायात नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए, और डिजिटल चालानों को भौतिक चालानों के समान ही कानूनी महत्व दिया जाना चाहिए।

