जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (सरकारी वकील) के पास जांच एजेंसी के अनुरोध के बिना आरोपी की पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति संजय परिहार की पीठ ने राज्य द्वारा दायर एक आपराधिक निगरानी याचिका (Criminal Revision Petition) को खारिज
