सुप्रीम कोर्ट से पूर्व मंत्री कवासी लखमा को अंतरिम ज़मानत, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के दो मामलों में गिरफ्तारी पर राहत

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस विधायक और छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को उन पर दर्ज दो अलग-अलग शराब घोटाले के मामलों में अंतरिम ज़मानत दे दी है। ये मामले प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB)/आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज किए गए थे।

लखमा को पहले 15 जनवरी 2025 को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद 2 अप्रैल 2025 को राज्य पुलिस की ACB/EOW ने उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ़्तार किया।

ED के अनुसार, यह कथित घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच उस समय हुआ जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार थी। आरोप है कि शराब के व्यापार में सक्रिय एक सिंडिकेट के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई, जिसमें राजनीतिक और नौकरशाही स्तर पर संरक्षण प्राप्त था।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने लखमा को अंतरिम ज़मानत दी। पीठ ने कहा कि पूर्व मंत्री एक वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं और दोनों मामलों की जांच अब भी जारी है, जबकि मुकदमे की कार्यवाही शुरू नहीं हुई है।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि मामलों में सैकड़ों गवाहों की गवाही होनी है, जो लंबी प्रक्रिया होगी। इन परिस्थितियों को देखते हुए अंतरिम ज़मानत दी गई, लेकिन साथ ही कड़ी शर्तें भी लगाई गईं।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

  • लखमा को ज़मानत अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा।
  • उन्हें विधायक के रूप में विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई।
  • उनका पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करवाना होगा।
  • वह किसी भी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं कर सकते।
  • उन्हें जांच एजेंसियों के साथ अपना मोबाइल नंबर और वर्तमान स्थान साझा करना होगा।
  • यदि वह शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो ED और ACB/EOW को ज़मानत रद्द कराने की छूट दी गई है।
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इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को भी प्रमुख साजिशकर्ता बताया गया है। ED के अनुसार, उन्होंने इस घोटाले से लगभग ₹1000 करोड़ की रकम स्वयं नियंत्रित की, जबकि ACB/EOW का दावा है कि उन्हें ₹200–250 करोड़ की हिस्सेदारी मिली।

ED ने दिसंबर 2025 में इस घोटाले में अंतिम अभियोजन शिकायत दायर की थी, जिसमें 59 नए नाम जोड़े गए। अब तक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुल 81 अभियुक्त बनाए जा चुके हैं। इनमें सौम्या चौरसिया, पूर्व IAS अधिकारी निरंजन दास, शराब लाइसेंसधारी, वितरक और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और ट्रायल शुरू होंगे, अदालत की निगरानी बनी रहेगी। यदि लखमा ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो एजेंसियां उनकी ज़मानत रद्द करने की मांग कर सकती हैं।

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